रेडियो पेजर कैसे काम करता है | How Radio Pager Works - EXAMS TIPS HINDI

Monday, March 30, 2020

रेडियो पेजर कैसे काम करता है | How Radio Pager Works

रेडियो पेजर कैसे काम करता है | How Radio Pager Works


इस आर्टिकल में 'रेडियो पेजर कैसे काम करता है?' की जानकारी दी गयी है। रेडियो पेजिंग सिस्टम एक दिशीय मोबाइल कम्युनिकेशन पद्धति (one way mobile communication) है और इस सुविधा की सहायता से किसी व्यक्ति से तब सम्पर्क बनाया जा सकता है, जब यह पता न हो कि वह व्यक्ति उस वक्त किस स्थान पर है। इस सुविधा के लिये वह व्यक्ति अपने पास पेजिंग रिसीवर रखता है। प्रत्येक पेजिंग रिसीवर को एक नम्बर allot किया जाता है। अतः, उस व्यक्ति से सम्पर्क बनाने हेतू उसके पेजिंग रिसीवर के नम्बर को डायल किया जाता है। यह कॉल टेलीफोन नैटवर्क के माध्यम से पेजिंग ट्रांसमिटर तक पहुँचायी जाती है । इस काल के प्राप्त होने के पश्चात पेजिंग टांसमिटर कोडेड रेडियो सिगनल (coded radio signal) भेजता है, जिसको पेजिंग रिसीवर द्वारा रिसीव व डिकोड किया जाता है। इस सिगनल को प्राप्त करने के पश्चात् वह व्यक्ति (जिसके पास पेजिंग रिसीवर है) उस व्यक्ति से टेलीफोन के माध्यम से बात कर सकता है, जिसने उसको पेज किया था। कुछ पेजिंग रिसीवर में बीप (beep) के साथ-साथ फोन नम्बर तथा मैसेज प्राप्त करने की सुविधा भी होती है।



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रेडियो पेजर कैसे काम करता है | How Radio Pager Works

स्पष्ट है कि पेजिंग सिस्टम एक दिशीय संचार सुविधा है। अतः, जिस व्यक्ति के पास पेजिंग रिसीवर होता है, उससे सम्पर्क स्थापित करने हेतु पेजिंग कम्पनी को उसका पेजर नम्बर डायल किया जाता है। पेजिंग कम्पनी में लगे कम्प्यूटर उस व्यक्ति के पेजिंग रिसीवर को सिगनल भेजते हैं। रिसीवर द्वारा इन सिगनलों को रिसीव करने पर बीप (beep) उत्पन्न करता है। पेजिंग सिस्टम को बहुत कम बैंडविड्थ की आवश्यकता होती है तथा यह 930-932 MHz बैंड में ऑपरेट करते हैं।

रेडियो पेजर की कार्यप्रणाली | Operation of Radio Pager

रेडियो पेजिंग सिस्टम के मुख्य उपकरण को पेजिंग कन्ट्रोल टर्मिनल (PCT) कहा जाता है । यह उपकरण सभी सब्सक्राइबर्स (subscribers) के डाटा को स्टोर करता है, कॉल को प्रोसैस करने व सिस्टम मॉनिटरिंग करने हेतु प्रोग्राम स्टोर करता है। PCT समस्त page requests को रिसीव करता है, उन्हें पंक्ति (queue) में रखता है तथा एक विशेष बाइनरी डिजिटल कोड में कनवर्ट करता है। यह कोड PCSAG (Post Office Code Standard Advisory Group) प्रोटोकॉल कहलाता है।

PCT की आउटपुट को लिंक ट्रांसमीटर को दिया जाता है जो इसको पुनः रिले करता है। लिक ट्रांसमीटर द्वारा रिले किये गये सिगनल सभी बेस स्टशनों द्वारा रिसीव किये जाते हैं तथा किसी अन्य आवृत्ति पर परिवर्तित (re-translate) करके सभी दिशाओं में ट्रांसमिट किये जाते हैं। पेजिंग रिसीवर इन सिगनलों को रिसीव करता है तथा सब्सक्राइबर को मैसेज प्राप्त हो जाता है। पेजिंग सिस्टम एक दिशीय होते हैं जबकि मोबाइल टेलीफोन दो दिशीय होते हैं।

अंत में-
पेजिंग एक वन-वे संचार विधि है । जिस व्यक्ति से सम्पर्क स्थापित करना हो,उसका पेजिंग नम्बर डायल किया जाता है। यह पेजिंग नम्बर पेजिंग कम्पनी के PCT को प्राप्त होता है जो कि पेजिंग रिसीवर को रेडियो सिगनल भेजती है।

उम्मीद है आपको रेडियो पेजर की जानकारी पसंद आयी होगी। यदि आपके पास कोई प्रश्न है तो नीचे 👇कमेंट में पूछ सकते है। धन्यवाद!

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