मोल्डिंग रेत और इसकी विशेषताएं | Moulding Sand and Its Properties in Hindi - EXAMS TIPS HINDI

Sunday, March 8, 2020

मोल्डिंग रेत और इसकी विशेषताएं | Moulding Sand and Its Properties in Hindi

मोल्डिंग रेत और इसकी विशेषताएं | Moulding Sand and Its Properties in Hindi


मोल्डिंग रेत (Moulding Sand)

मोल्डिंग रेत दो वर्गों में बांटा गया है-
i) प्राकृतिक रेत (Natural Sand)
ii) कृत्रिम रेत (Synthetic Sand)
प्राकृतिक रेत को सीधे ही साँचा बनाने में प्रयोग किया जाता है। इसमें 5 से 20 % तक क्ले होती है जो बंधक पदार्थ काम करती है। साँचा बनाने से पूर्व इसमें 5 से 8% तक पानी मिलाया जाता है। प्राकृतिक रेत की तुलना में कृत्रिम रेत एक अच्छा मोल्डिंग पदार्थ है। कृत्रिम रेत को प्राप्त करने के लिए प्राकृतिक रेत में उपर्युक्त मात्रा में बंधक पदार्थ तथा पानी आदि मिलाया जाता है।

मोल्डिंग रेत और इसकी विशेषताएं  Moulding Sand and Its Properties in Hindi


मोल्डिंग रेत की विशेषताएं | Moulding Sand Properties 

अच्छी ढलाई तथा उपयोगिता के लिए मोल्डिंग रेत में निम्न प्रमुख गुणों का होना आवश्यक है-
  1. दुर्गलनीयता (Refractoriness):- वह गुण जिसके कारण बिना गले मोल्डिंग रेत पिघली धातु के उच्च तापमानों को सहन करती हैं दुर्गलनीयता कहलाता है। उच्च तापमान पर उड़ेली जाने वाली धातु के लिए मोल्डिंग रेत में यह गुण भी अधिक होना चाहिए। मोल्डिंग रेत में यह गुण SiO2 के कारण होता है
  2. पारगम्यता या सरंध्रता (Premeability or Porosity):- वह गुण जिसके कारण रेत सांचे से होकर भाप तथा गैस बाहर निकल जाती हैं। रेत की पारगम्यता या सरंध्रता कहलाती है। जब पिघली धातु को रेत साँचे में उड़ेला जाता है और यह साँचे की रेत तथा क्रोड़ के संपर्क में आती है तो रेत में उपस्थित नमी, बंधक पदार्थ (क्ले आदि), कोल धूल तथा तेल आदि के गर्म होने से भांप तथा गैसें उपजती हैं। इसके अतिरिक्त पिघली धातु के जमने से भी उसमें धुली गैसें स्वतंत्र हो जाती है। यदि यह गैस बाहर ना निकल पाए तो ढ़लाई में गैस छिद्र, साँचे का फटना आदि दोष पाए जाते हैं।
  3. प्रवाहशीलता या प्लास्टिकता(Flowbility or Plasticity):-  प्रभावशीलता, रेत का वह गुण है जिसके कारण कुटाई के अंतर्गत व प्रभावित होकर मोल्ड़िंग बॉक्स तथा पैटर्न के चारों ओर सभी स्थानों को भर देती है और वांछित आकृति का साँचा प्रदान करती है। इस गुण के कारण कुटने का दाब रेत द्वारा साँचे के सभी भागों पर समान रूप से बंट जाता है जिससे सभी स्थानों पर घनत्व समान हो जाता है।
  4. आसंजकता (Adhesiveness):- इस गुण के कारण रेत का कण एक दूसरे से चिपके रहते हैं। इस प्रकार रेत मोल्ड़िंग बॉक्स के दीवारों से चिपकी रहती है और उसे उठाने आदि से नही गिरती। आसंजकता के कारण ही रेत गैगर आदि से भी चिपक जाता है।
  5. सामंजस्य (Cohesiveness):- यह वह गुण है जिसके कारण रेत के कण एक दूसरे से आपस में चिपके रहते हैं। इस गुण को सामर्थ्य आदि से भी बताया जाता है। यह गुण रेत के कणों के साइज, उसमें क्ले तथा नमी की मात्रा पर निर्भर करता है। जब यह किसी मोल्ड़िंग रेत में गुण कम होता है तो पैटर्न निकालते समय या साँचे के हस्तानांतरण के अंतर्गत साँचा टूट सकता है।
  6. ढह जाना (Collapsibility):- इस गुण के कारण सांचे में धातु जमने पर साँचा स्वयं ही ढह जाता है जिससे धातु स्वतंत्रता से सिकुड़ पाती है। यदि साँचा स्वतः ना ढहे तो धातु के संकुचन में बाधा के कारण ढ़लाई में दरारें पड़ जाती है।
  7. अन्य महत्वपूर्ण गुण:-  
  • मोल्डिंग सैंड का प्रसार गुणांक कम होना चाहिए।
  • सैंड का यह पुनः प्रयोग करने योग्य होने चाहिए।
  • इसे बनाना सुगम होना चाहिए।
  • इसके गुणों का नियंत्रण आसानी से हो सकता हो।
  • यह सस्ती होनी चाहिए।
  • यह ढ़लाई की सतह से चिपकने वाली नहीं होनी चाहिए।
उम्मीद है यह लेख आपको पसंद आया होगा। यदि आपके पास कोई प्रश्न है तो कमेंट में पूछ सकते है।

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