सोल्डरिंग क्या है और सोल्डरिंग आयरन के प्रकार | What is Soldering and Types of Soldering Iron - EXAMS TIPS HINDI

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Monday, May 4, 2020

सोल्डरिंग क्या है और सोल्डरिंग आयरन के प्रकार | What is Soldering and Types of Soldering Iron

सोल्डरिंग क्या है और सोल्डरिंग आयरन के प्रकार | What is Soldering and Types of Soldering Iron

सोल्डरिंग क्या है (What is Soldering)

दो एक सी धातुओं, खास तौर पर पतली चादरों (sheets) को आपस में अर्ध-स्थायी रूप से जोड़ने की विधि को सोल्डरिंग कहते हैं। धातु के टुकड़ों को जोड़ने के लिए एक अन्य फिलर मैटल प्रयोग की जाती है और इस जोड़ने वाली धातु को ही सोल्डर (solder) कहते हैं। सोल्डर को पिघली हुई अवस्था में प्रयोग किया जाता है। सोल्डर मुख्यत: लैड (lead) और टिन (tin) की ऐलॉय (alloy) होती है। कभी-कभी इसका गलनांक (melting point) कम करने के लिए दूसरी धातुएं भी मिलाई जाती हैं। साधारण सोल्डर का गलनांक 200°C होता है। सोल्डरिंग के लिए उपयोगी फिलर मैटल अर्थात् सोल्डर का गलनांक 350°C से कम ही होना चाहिए। सोल्डर के विभिन्न मिश्रण एवं उपयोग इस प्रकार है-


टिन %
लेड %
उपयोग
70
30
कोटिंग के लिए
63
37
गहरी और हेड सोल्डरिंग के लिए
60
40
फाइन सोल्डरिंग के लिए
50
50
साधारण कार्यों की सोल्डरिंग के लिए
30
70
मशीन और टॉर्च सोल्डरिंग के लिए 
20
80
ऑटोमोबाइल में बॉडी के डेंट भरने
के लिए


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सोल्डरिंग क्या है और सोल्डरिंग आयरन के प्रकार | What is Soldering and Types of Soldering Iron

सोल्डर के प्रकार | Types of Solder


1. नरम सोल्डर (Soft Solder) : इसका प्रयोग प्रायः उन पतली चादरों (sheets) को जोड़ने के लिए किया जाता है जिन्हें न तो ऊँचे तापमान का सामना करना पड़े और न ही अधिक बल व भार सहना हो। इसके अतिरिक्त छोटे-छोटे पार्ट्स तथा तारों को जोड़ने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
यह सोल्डर मुख्यत: सीसे (lead) और टिन (tin) को मिलाकर बनाया जाता है। इसके पिघलने का तापमान 150-300°C तक होता है परंतु इसमें विस्मथ और एंटीमनी मिलाने से इसका गलनांक (meltingpoint) बहुत कम अर्थात् 56°C तक गिर जाता है।

2. कठोर सोल्डर (Hard Solder): यह तांबे (copper) और जस्ते (zinc) की एलॉय है, जिसमें कभी-कभी थोड़ी-सी चांदी (silver) भी मिला ली जाती है (सिल्वर सोल्डर बनाने के लिए)। यह नरम सोल्डर की अपेक्षा अधिक कठोर होता है तथा इसका गलनांक 350°-600°C तक होता है। इसका इस्तेमाल कठोर सोल्डरिंग (Hard soldering) अर्थात् ब्रेजिंग (brazing) में किया जाता है। कठोर सोल्डर में जस्ते (zinc) की मात्रा बढ़ाने से गलनांक कम होता है, तांबे की मात्रा बढ़ाने से गलनांक बढ़ता है। 700°C से कम तापमान पर पिघलने वाली धातुओं पर ब्रेजिंग नहीं की जा सकती। इसका जोड़ बहुत मजबूत होता है, अत: भारी भार एवं कंपन बर्दाश्त करने वाले व ऊँचे तापमान के अधीन रहने वाले जॉब (iobs) को कठोर सोल्डरिंग अर्थात् ब्रेजिंग के द्वारा जोड़ा जाता है। यह हार्ड सोल्डर भी निम्नलिखित दो प्रकार का होता है-
(i) स्पेल्टर (Spelter) : यह तांबा और जस्ता या तांबा, जस्ता व टिन अथवा तांबा, जस्ता और कैडमियम मिलाकर बनाया जाता है। अधिकतर तांबा और जस्ता बराबर-बराबर मात्रा में मिलाए जाते हैं। 2/3 भाग तांबा और ⅓ भाग जस्ता मिलाकर तैयार किया गया स्पेल्टर बहुत मजबूत जोड़ तैयार करता है। 1/2 भाग तांबा, 3/8 भाग जस्ता और 1/8 भाग टिन मिलाने से बहुत अच्छा स्पेल्टर तैयार होता है। यह दानेदार या तार की शक्ल में मिलता है।
(ii) सिल्वर सोल्डर (SIlver Solder): यह तांबा और चांदी या तांबा, चादी और जस्ता मिलाकर बनाया जाता है। यह अधिकतर 5 भाग ताबा, 3 भाग जस्ता और 2 भाग चांदी मिलाकर बनाया जाता है। इसका गलनांक नरम सोल्डर से अधिक लेकिन स्पेल्टर से बहुत कम होता है।

सोल्डर वायर और स्टिक | Solder Wire and Stick

साधारण प्रयोग में लाए जाने वाले सोल्डर तार या छड़ो के रूप में मिलते साधारण प्रयाग में लाए जान वाले सोल्डर तार या छड़ों के रूप में मिलते है। आवश्यकता के अनुसार इनके अवयवों की मात्रा में भिन्नता होती है क्योंकि ये विभिन्न धातुओं की सोल्डरिंग करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं और इन रूपों में ये स्वचालित (automatic) सोल्डरिंग विधियों के लिए भी उपयोग में लाए जाते हैं।

1. रेजिन कोर्ड सोल्डर (Resin Cored Solder) : सोल्डरिंग करते समय साधारणतया तीन क्रियाओ को एक साथ किया जाता है, (i) फ्लक्स (Flux) लगाना, (ii) सोल्डरिंग आयरन को गरम करना तथा (iii) सोल्डरिंग करना। ये तीनों ही कार्य अलग-अलग करने होते हैं।

फ्लक्स क्या है, फ्लक्स के प्रकार

इसका प्रयोग जोड़ी जाने वाली सतह को ऑक्सीडेशन से बचाने तथा सोल्डर को पिघलाने के लिए किया जाता है। यह सतह को साफ रखता है तथा सोल्डर को फैलाने में भी सहायता करता है अर्थात् (i) इसके प्रयोग से जोड़ की सतह पर जमी कार्बन एवं अन्य अशुद्धियाँ साफ हो जाती हैं, (ii) ये सोल्डर को शीघ्र पिघलाने में सहायक होते हैं, (ii) ये सोल्डर को शीघ्र बहने में सहायता करते हैं ताकि सोल्डर तंग जगह में भी आसानी से पहुंच जाए, (iv) यह धातु पर सोल्डर की पकड़ को मजबूत बनाने में सहायक होता है। सामान्य रूप से प्रयोग किए जाने वाले फ्लक्स जिंक क्लोराइड या एमोनियम क्लोराइड अथवा दोनों पानी में घोलकर या पैट्रोल में मिलाकर बनाए जाते हैं। फ्लक्स में प्रायः 71% जिंक क्लोराइड तथा 29% एमोनियम क्लोराइड रखा जाता है।
ये दो प्रकार के होते है- कोरोसिव और नॉन-कोरोसिव फ्लक्स।
अत: स्पष्ट है कि जिस माध्यम से ज्वाइंट को साफ किया जाता है उसे फ्लक्स कहते हैं। यह प्राय: तरल, पेस्ट या पाउडर के रूप में पाया जाता है। जब सोल्डरिंग या ब्रेजिंग की जाती है तो जोड़ के ऊपर फ्लक्स को लगाया जाता है। फ्लक्स के निम्नलिखित मुख्य कार्य होते हैं :
1. जोड़ को साफ करना।
2. जोड़ के ऊपर सोल्डर या स्पेल्टर की मजबूत पकड़ लाना।

मुख्य फ्लक्स (Main Flux)
1. हाइड्रोक्लोरिके एसिड (Hydrochloric Acid) : सोल्डरिंग के लिए इस अम्ल को पानी में डालकर हल्का कर लिया जाता है। यह नरम और कठोर दोनों प्रकार के सोल्डर के लिए उपयोगी है। मुख्यत: जिंक चादर या जिंक लेपित चादरों (Galvanised Sheet) का सोल्डरिंग करते समय इसे प्रयोग किया जाता है।

2. जिंक क्लोराइड (Zine Chloride) : इस फ्लक्स को ताँबे, पीतल, इस्पात तथा लोहे आदि के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे चूर्ण के रूप में सतहों पर छिड़कते हैं या पानी में घोलकर प्रयोग करते हैं। इसके लिए तीन भाग पानी में एक भाग जिंक क्लोराइड मिलाते हैं।

3. सुहागा (Borax) : इसे चांदी तथा ताँबे (Copper) के ब्रेजिंग में प्रयोग किया जाता है। इसको चूर्ण के रूप में सतहों पर छिड़कते हैं या पानी में घोलकर प्रयोग करते हैं।

4. रेजिन (Resin): इसे चूर्ण, छड़ या तरल के रूप में प्रयोग किया जाता है। धातु को ऑक्सीकरण से बचाता है। यह नॉन कोरोसिव फ्लक्स है तथा अधिकतर विद्युत जोड़ों के लिए प्रयोग किया जाता है।

5. सोल्डरिंग पेस्ट (Soldering Paste): यह पेस्ट जिंक क्लोराइड को स्टार्च (Starch) में मिलाकर बनाया जाता है।

6. साल्स अमोनिक (Sals Ammoniac) : यह पाउडर या रवों के रूप में नरम सोल्डर के साथ प्रयोग किया जाता है। यह धातु सतहों पर से चिकने पदार्थों को घोल लेता है। यह घोल सोल्डरिंग आयरन की बिट को साफ करने के काम आता है।

सोल्डरिंग आयरन और सोल्डरिंग आयरन के प्रकार


सोल्डरिंग करने के लिऐ जिस टूल का प्रयोग किया जाता है उसे सोल्डरिंग ऑयरन कहते हैं। इसके हैंडल, शैंक और टिप तीन मुख्य पार्ट्स होते हैं। प्राय: निम्नलिखित प्रकार के सोल्डरिंग ऑयरन पाए जाते हैं :

1. प्लेन सोल्डरिंग आयरन (Plain Soldering Iron) : इस प्रकार के सोल्डरिंग आयरन में गोल, षट्टभुज या अष्टभुज तांबे की टिप लगी होती है। जिसका आगे का सिरा टेपर करके नुकीला बना दिया जाता है। इसका प्रयोग प्राय: हल्के कार्यों के लिए किया जाता है।

2. हैचेट सोल्डरिंग आयरन (Hatchet Soldering Iron) : इस प्रकार के सोल्डरिंग आयरन का टिप प्रायः तांबे का होता है जिसका आकार कुल्हाड़ी जैसा होता है। यह प्लेन सोल्डरिंग आयरन की अपेक्षा कुछ बड़े साइज की होती है। इसका प्रयोग प्रायः साधारण कार्यों के लिए किया जाता है।

3. गैस सोल्डरिंग आयरन (Gas Soldering Iron) : इस प्रकार की सोल्डरिंग आयरन में एक हॉलो पाइप और एक हॉलो कॉपर टिप होती है। जिनको एक हॉलो हैंडल के साथ फिट कर दिया जाता है। हैंडल के सिरे पर गैस का एक फ्लैक्सीबल पाइप फिट कर दिया जाता है जिससे गैसे प्रवाहित की जाती है और टिप पर बने हुए हवा के सुराखों से गैस की ज्वाला उत्पन्न होती है। इस प्रकार की सोल्डरिंग आयरन प्रायः वहाँ पर प्रयोग में लायी जाती है जहाँ पर सोल्डरिंग कार्य लगातार करना होता है।

4. कार्टिंज सोल्डरिंग आयरन (Cartridge Soldering Iron) : इस प्रकार के सोल्डरिंग हैंडल के साथ आयरन में एक कार्ट्रिज चैम्बर होता है जिसके एक सिरे पर कॉपर टिप और दूसरे सिरे पर एक गोल रॉड फिट रहते हैं। चैम्बर के अंदर एक कार्ट्रिज रखी जाती है जिसमें मैग्नीशियम कंपाउंड का मिक्स्चर भरा रहता है। हैंडल के साथ फिट की हुई रॉड से धक्का लगाकर इसमें ज्वाला उत्पन्न की जाती है जिससे टिप गर्म हो जाती है। एक कार्ट्रिज लगभग 7 मिनट तक सोल्डरिंग आयरन को गर्म रख सकती है। इस प्रकार की सोल्डरिंग आयरन प्रायः वहाँ पर प्रयोग की जाती है जहाँ पर अधिक कठिन सोल्डरिंग करनी पड़ती है।

5. इलैक्ट्रिक सोल्डरिंग आयरन (Electric Soldering Iron ) : इस प्रकार के सोल्डरिंग आयरन को बिजली के द्वारा गर्म किया जाता है जिसके सिरे पर तांबे की एक प्लेन टिप लगायी जाती है। इस सोल्डरिंग आयरन का प्रयोग प्रायः हल्के कार्यों जैसे रेडियोट्रांजिस्टर, टेलिविजन व टेलिविजन आदि में विद्युत के तारों को जोड़ने में किया जाता है। इसके अंदर एक एलीमेंट होता है जिसमें विद्युत धारा प्रवाहित करके इसे गर्म किया जाता है। इस एलीमेंट को माइका इन्सूलेटर के द्वारा बिट से अलग किया जाता है। ये 25 से 150 वाट के हीटिंग एलीमेंट्स की रेन्ज में मिलती हैं। 5/32" व्यास की बिट वाली 25 वाट की सोल्डरिंग आयरन इलैक्ट्रानिक कार्य एवं छोटे धातु पात्रों के लिए संतोषजनक है। बड़े टर्मिनल्स (जैसे कुछ ट्रान्सफॉमर्स पर) व मध्यम साइज के धातु पात्रों के लिए 5.8" व्यास की बिट एवं 80 वाट की सोल्डरिंग आयरन को उपयोग में लाना चाहिए।

इस आर्टिकल में सोल्डरिंग क्या है, सोल्डर कितने प्रकार के होते है, सोल्डर वायर क्या है, फ्लक्स क्या है, फ्लक्स के प्रकार और सोल्डरिंग आयरन के प्रकार की जानकारी दी गयी है। उम्मीद है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी रहेगा। यदि आपके पास किसी प्रकार का प्रश्न या सुझाव है तो नीचे👇 कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।
यह भी पढ़ें:-
फाइबर ऑप्टिक्स क्या है, इसके लाभ व सीमाएं

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