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राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन | Agriculture and Animal Husbandry in Rajasthan

राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन | Agriculture and Animal Husbandry in Rajasthan

नमस्कार दोस्तों, Exams Tips Hindi शिक्षात्मक वेबसाइट में आपका स्वागत है। इस आर्टिकल में राजस्थान  में कृषि एवं पशुपालन से संबंधित सामान्य ज्ञान (Rajasthan Agriculture and Animal Husbandry GK) दिया गया है। इस आर्टिकल में राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन से संबंधित जानकारी का समावेश है जो अक्सर परीक्षा में पूछे जाते है। यह लेख राजस्थान पुलिस, पटवारी, राजस्थान प्रशासनिक सेवा, बिजली विभाग इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है।


राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन, Agriculture and Animal Husbandry in Rajasthan
राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन | Agriculture and Animal Husbandry in Rajasthan

➤ कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था होने के बावजूद राजस्थान में कृषि योग्य भूमि का अभाव है, क्योंकि राज्य का एक बड़ा भू-भाग थार मरुस्थल से घिरा हुआ है।
➤ वर्षा कम होने से पानी का भी अभाव है।

➤ राज्य में जैसलमेर, बीकानेर, बाड़मेर, नागौर, जालौर, चुरु, झंझुन, सीकर जिले कृषि के लिए अनुपयुक्त हैं।

➤ राजस्थान के केवल दक्षिणी पूर्वी पठारी भाग और पूर्वी मैदानी भाग में उचित मात्रा में वर्षा होने के कारण खेती योग्य भूमि पायी जाती है।


राजस्थान की फसलें


➤ राज्य के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र कृषि विकास की दृष्टि से पिछड़े हैं।

➤ राज्य में फसलों को उपयोग के आधार पर निम्न भागों में बाँटा जा सकता है-

➤  खाद्यान्न फसलें-बाजरा, गेहूँ, जौ, ज्वार, मक्का, चावल व दालें आदि।

➤  वाणिज्यिक फसलें-कपास, गन्ना व तिलहन आदि।

➤  पेय पदार्थों वाली फसलें तम्बाकू व अफीम आदि।

➤  रेशेदार पदार्थों वाली फसलें-कपास, सन, हेम्प, मेस्ट्रा व फ्लैक्स।

➤  चारे की फसलें बरसीम, रिजका आदि।


राजस्थान की फसलें (जिलेवार)


फसल

जिले

गेंह

श्रीगंगानगर, जयपुर, अलवर, भरतपुर, कोटा, बूंदी, चित्तौड़, भीलवाड़ा, सवाई माधोपुर व उदयपुर।

बाजरा

जोधपुर, जालौर, अलवर, सीकर, नागौर, चुरु, बाड़मेर, झुंझुनूं व सवाई माधोपुर।

चना

श्रीगंगानगर, बूंदी, कोटा, चुरु, जयपुर, बारां, भीलवाड़ा व सवाई माधोपुर।

ज्वार

झालावाड़, कोटा, अजमेर, टोंक, बारां, बूंदी, सवाई माधोपुर व चित्तौड़गढ़।

मक्का

चित्तौड़गढ़, उदयपुर, भीलवाड़ा, बाँसवाड़ा, राजसमंद व झालावाड़।

तम्बाकू

झुंझुनूं, सिरोही, जयपुर व अलवर।

लाल मिर्च

जोधपुर, अलवर, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, टोंक व जयपुर।

गन्ना

बूंदी, श्रीगंगानगर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, कोटा व राजसमंद।

रायड़ा व सरसों

श्रीगंगानगर, अलवर, भरतपुर, जयपुर, सवाई माधोपुर, जालौर, नागौर, पाली व कोटा।

जोजोबा

जोधपुर, श्रीगंगानगर, जयपुर व चुरू।

मूंगफली

चित्तौड़गढ़, जयपुर, दौसा, सवाई माधोपुर व टोंक।

सूरजमुखी

झालावाड़, श्रीगंगानगर, कोटा, जोधपुर व बीकानेर।

तिल

नागौर, पाली, जोधपुर, जालौर व अजमेर।

सोयाबीन

झालावाड़, कोटा, बूंदी, चित्तौड़गढ़ व बारां।

इसबगोल

जालौर, सिरोही व बाड़मेर।

देशी कपास

उदयपुर, चित्तोड़गढ़ व बाँसवाड़ा।

अफ़ीम

चित्तौड़गढ़, बारां, बाँसवाड़ा, बूंदी, भीलवाड़ा, झालावाड़ व कोटा।

चुकंदर

श्रीगंगानगर।

नील

पाली, सिरोही वं उदयपुर।

जीरा

जालौर, अजमेर, पाली, सिरोही, बाड़मेर व नागौर।

काली मिर्च

काली मिर्च बाड़मेर, जोधपुर व नागौर।


राजस्थान का फसल-चक्र व उपयुक्त मिट्टी


फसल

वर्षा

फसल चक्र

उपयुक्त मिट्टी

गेहूँ

50 से 75 सेमी

रबी

उपजाऊ दोमट

दोमट मिट्टी,

बारीक रेतीली तथा कांप

मिट्टी

बाजरा

40 से 50 सेमी

खरीफ

बलुई व बलुई दोमट

ज्वार

30 से 100 सेमी

खरीफ

काली मिट्टी, दोमट व चिकनी कांप मिट्टी

मक्का

150 से 100 सेमी

खरीफ

दोमट मिट्टी

चना

165 से 95 सेमी

रबी

हल्की बलुई मिट्टी

चावल

125 से 200 सेमी

खरीफ

दोमट, कांप व चिकनी मिट्टी

सरसों

30 से 75 सेमी

रबी

दोमट मिट्टी

जौ

सामान्य/शुष्क

रबी

बालू मिश्रित दोमट मिट्टी

कपास

50 से 100 सेमी

खरीफ

चिकनी व काली मिट्टी

गन्ना

125 से 165 सेमी

-

काली व दोमट मिट्टी

तम्बाकू

50 से 100 सेमी

-

बलुई दोमट अथवा कछारी मिट्टी

मूंगफली

60 से 130 सेमी

खरीफ

हल्की बलुई मिट्टी

तिल

सामान्य/शुष्क

खरीफ

हल्की बलुई मिट्टी

आलू

50 से 120 सेमी

रबी

जीवांश युक्त रेतीली दोमट मिट्टी



➤ राज्य में मालवी किस्म की कपास का सर्वाधिक उत्पादन सिरोही जिले में होता है।

➤ राज्य में बाजरा सर्वाधिक बोई जाने वाली फसल है।

➤ राज्य में रबी अनाजों के अन्तर्गत अधिक क्षेत्र पर चना बोया जाता है।

➤ राज्य में मसालों के अन्तर्गत धनिया सर्वाधिक क्षेत्र पर बोया जाता है।

➤ भारत का 50% धनिया राज्य में उत्पादित होता है।

➤ रामगंज मण्डी देश की सबसे बड़ी धनिया मण्डी है।

➤ देश का लगभग 25% जौ राजस्थान से प्राप्त होता है।

➤ मक्का दक्षिणी राजस्थान की मुख्य खाद्य फसल है। इस भाग में वर्ष में तीन-तीन फसलें ली जाती हैं।

➤ बीकानेर का भुजिया-पापड़ उद्योग दलहन के उत्पादन पर निर्भर है।

➤ गैर-कृषि कार्यों के उपयोग में आने वाली भूमि का सबसे अधिक क्षेत्रफल बीकानेर तथा सबसे कम बाँसवाड़ा जिले में है।

➤ बंजर तथा अकृषि भूमि का सबसे अधिक क्षेत्र जैसलमेर जिले में है।

➤ कृषि योग्य व्यर्थ भूमि का सबसे अधिक क्षेत्र जैसलमेर जिले में तथा सबसे कम भरतपुर जिले में है।

➤ राज्य में चालू परती भूमि सबसे अधिक जोधपुर में तथा सबसे कम राजसमन्द जिले में है।

➤ राज्य में शुद्ध सकल बोया क्षेत्र सबसे अधिक चुरु जिले में है।

➤ राज्य में एक से अधिक बार बोया गया क्षेत्र सबसे अधिक नागौर जिले में तथा सबसे कम जैसलमेर में है।

➤ राजस्थान राज्य बीज निगम की स्थापना वर्ष 1978 में की गई थी जो जयपुर में स्थित है।

➤ राज्य में कृषि फसल संरक्षण कार्यक्रम 1983 ई. में अपनाया गया।

➤ विश्व बैंक की सहायता से कृषि विस्तार प्रणाली अपनाने वाला राजस्थान देश का प्रथम राज्य है।

➤ राज्य में कृषि उत्पादन के लिए उन्नत बीज प्रणाली वर्ष 1966 में शुरू की गयी।

➤ राज्य में मित्र कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम वर्ष 1981 में प्रारम्भ किया गया।

➤ राज्य में जयपुर व कोटा में बीज परीक्षण प्रयोगशालाएँ हैं।

➤  चारे के प्रामाणिक बीजों के उत्पादन और प्रचार-प्रसार का कार्य केंद्र सरकार के क्षेत्रीय केंद्र सूरतगढ़ द्वारा किया जाता है।

➤  कपास प्रौद्योगिकी मिशन से आर्थिक सहायता दो कपास मण्डियों श्री विजयनगर और अनूपगढ़ के विकास के लिए प्राप्त

➤  राज्य में कृषि विपणन निदेशालय की स्थापना फरवरी, 1980 में की गई।

➤  देश का पहला राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसन्धान केंद्र तबीजी (अजमेर) में 1999 ई. में स्थापित किया गया था।

➤  राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के उदयपुर केंद्र पर मशरूम का अनुसन्धान कार्य 1976 ई. से आरम्भ किया गया था।

➤  राजस्थान की कुल कृषि आय का 15% माग पशुपालन से प्राप्त होता है।

➤  राजस्थान में राज्य पशु परिषद का गठन वर्ष 1993 में किया गया

➤ सर्वाधिक ऊन देने वाली ह चौकला, मगराय नाली हैं।

➤ चौकला नस्ल को भारत की मेरीनो भेड़ कहा जाता है।

➤  सवारी के लिए सर्वोत्तम औट 'गोमठ' (जोधपुर) माना जाता है।

➤  भार ढोने के लिए सर्वोत्तम ऊँट बीकानेरी' नस्ल का माना जाता है।

➤  आलमजी का घोरा (बाड़मेर) घोड़ों का तीर्थस्थल माना जाता है।

➤  राज्य में सबसे अधिक पशु धनत्व डूंगरपुर जिले में है।

➤  केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड जोधपुर में स्थापित किया गया है।

➤  भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद ने बीकानेर एवं सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर) में भेड़ अनुसन्धान केंद्र स्थापित किए हैं।

➤  जोड़बीड़ में केंद्रीय ऊँट अनुसन्धान संस्थान है।

➤  केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसन्धान संस्थान अविकानगर, मालपुरा (टोंक) में है।

➤  केंद्रीय बकरी अनुसन्धान संस्थान (पश्चिमी क्षेत्र), अविकानगर, मालपुरा (टोंक) में है।

➤  केंद्रीय ऊंट अनुसन्धान केंद्र संस्थान, जोड़बीड़, बीकानेर में है।

➤  राजस्थान सहकारी दुग्ध संघ (RCDF) की स्थापना 1973 ई. में की गई थी।


राजस्थान में भेड़ों की प्रमुख नस्लें


1. जैसलमेरी- ये भेड़ें काले-भूरे चेहरे वाली होती हैं। इस नस्ल का जन्म स्थान जैसलमेर जिला है। इनसे 2 से 3.5 किया ऊन औसतन प्रतिवर्ष प्राप्त होती है। इस भेड़ की ऊन का रेशा 10 से 12 सेमी लंबा होता है। इस नस्ल की भेड़ें मुख्यतः जैसलमेर, जोधपुर व बाड़मेर जिलों में पाई जाती हैं।


2. नाली- इस नस्ल की भेड़ें मुख्यतः श्रीगंगानगर, बीकानेर, व इनके समीपवर्ती चुरू जिलों में पायी जाती हैं। इन भेड़ों की ऊन पीलापन लिए हुए, घनी, मोटी एवं 10-12 सेमी लंबे रेशे वाली होती है। इन भेड़ों से 3-4 किग्रा ऊन औसतन वार्षिक प्राप्त होती है।


3. मगरा- इन भेड़ों को बीकानेरी 'चोकला' भी कहते हैं। यह बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर व नागौर जिलों में पाली जाती हैं। इनसे 2 किग्रा ऊन प्रतिवर्ष प्राप्त होती है। ऊन का रेशा 10-12 सेमी लंबा होता है। इस भेड़ से प्राप्त ऊन सबसे चमकीली होती है।


4. चोकला- इस नस्ल की भेड़ों को 'शेखावटी' के नाम से भी जाना जाता है। यह नस्ल चुरू, झुंझुनू, सीकर, बीकानेर व जयपुर मुख्यतः पायी जाती हैं। इससे 1.5 से 2.0 किया ऊन प्रतिवर्ष प्राप्त होती है। इन्हें 'भारतीय मेरीनो' कहा जाता है।


5. पूगल- इस नस्ल का मूल स्थल पूगल (बीकानेर) है। यह नस्ल मुख्यतः बीकानेर व जैसलमेर जिलों में पायी जाती है। इन भेड़ों का चेहरा काला, निचला जबड़ा भूरा या सफेद तथा नाक और भौंहों के चारों ओर भूरी रेखाएं होती हैं। इस भेड़ से प्रतिवर्ष औसतन 2 किग्रा तक ऊन प्राप्त होती है।


6. मारवाड़ी- ये भेड़ें मुख्यतः जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर व पाली जिलों में पाली जाती हैं। यह नस्ल कच्छ व गुजरात में भी पायी जाती है। यह भेड़ औसतन 1.5 किग्रा से 1.8 किग्रा उन प्रतिवर्ष देती है। इस भेड़ का आकार मध्यम, चेहरा काला व कान छोटे होते हैं। इस भेड़ का मांस अति उत्तम व स्वादिष्ट होता है।


7. सोनाड़ी- इस नस्ल को चनोथर भी कहते हैं। यह भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूंगरपुर व बाँसवाड़ा में पायी जाती है। इसका वजन औसतन 55 से 60 किग्रा होता है। यह प्रतिदिन एक किलोग्राम तक दूध देती है। इससे औसतन 1.5 किग्रा ऊन प्रतिवर्ष प्राप्त होती है।


8. बागड़ी- इनसे प्राप्त ऊन का रेशा छोटा होता है। इस नस्ल की भेड़ें मुख्यतः अलवर में पायी जाती हैं।


राजस्थान में सिंचाई संसाधन


➤  वर्ष 2009-10 में राज्य में सकल सिंचित क्षेत्र 73.09 लाख हैक्टेयर था, जो वर्ष 2008-09 के 79.10 लाख हैक्टेयर क्षेत्र से 7.60 प्रतिशत कम है।

➤  सकल सिंचित क्षेत्रफल का लगभग 60% अलवर, भरतपुर, जयपुर, दौसा, करौली, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा, पाली, उदयपुर, राजसमन्द और चित्तौड़गढ़ जिले में विस्तृत है।

➤  सकल सिंचित क्षेत्र में से 69.88% कुओं एवं नलकूपों से, 28.86% नहरों से एवं 1.26% अन्य साधनों द्वारा सिंचित था।

➤  राज्य का जल संसाधन विभाग सिंचाई सुविधाओं के विस्तार हेतु विभिन्न वृहद्, मध्यम एवं लघु सिंचाई परियोजनाओं के माध्यम से उपलब्ध सतही जल के दोहन एवं उपयोग हेतु प्रयासरत है। इन परियोजनाओं के माध्यम से मार्च, 2011 के अंत तक राज्य में 40.72 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन किया गया।

➤  वर्ष 2011-12 में दिसंबर, 2017 तक 17,447 हैक्टेयर क्षेत्र की अतिरिक्त सिंचाई क्षमता (इंदिरा गाँधी नहर परियोजना सहित) सृजित की गई है।


राजस्थान में सिंचाई के साधन


कुएँ व नलकूप- अलवर, जयपुर, भरतपुर, जालौर, सिरोही, टोंक, सवाई माधोपुर, भीलवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़

नहरें- श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, कोटा, बूंदी, भरतपुर व जैसलमेर

तालाब- उदयपुर, राजसमन्द, कोटा, टोंक, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, पाली, चित्तौड़गढ़ व बूंदी

➤  राज्य के सर्वाधिक क्षेत्र में नहरी सिंचाई श्रीगंगानगर जिले में होती है। इसके पश्चात् हनुमानगढ़, कोटा, बीकानेर व बूंदी जिले हैं।

➤  नलकूपों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई भरतपुर जिले में होती है।

➤  तालाबों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई उदयपुर, भीलवाड़ा, राजसमन्द और पाली जिलों में होती है।

➤  प्रथम पंचवर्षीय योजना के अन्तर्गत वर्ष 1952-53 में कोठारी नदी पर मेजा बांध का निर्माण किया गया जो वर्ष 1956-57 में पूर्ण हुआ।

➤  वर्ष 1956 में पाली जिले में जवाई नदी पर जवाई बाँध का निर्माण किया गया।

➤  चंबल नदी घाटी परियोजना के अन्तर्गत तीन बाँध एवं एक बैराज का निर्माण किया गया है। ।

➤  ये तीन बाँध गाँधी सागर-भानपुरा (म.प्र.), राणा प्रताप सागर-रावतभाटा (राजस्थान) व जवाहर सागर-कोटा (राजस्थान) हैं।

➤  माही की सहायक जाखम नदी पर बनी जाखम सिंचाई परियोजना उदयपुर एवं चित्तौड़गढ़ जिले में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराती है।

➤  राजस्थान और गुजरात के मध्य माही नदी पर बनायी गई एक बहुउद्देश्यीय संयुक्त परियोजना माही बजाज सागर परियोजना के तहत बोरखेड़ा ग्राम के समीप एक बाँध का निर्माण किया गया है।

➤  टोंक जिले के बीसलपुर के समीप बनास नदी पर जयपुर, अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़ की पेयजल और सिंचाई की पूर्ति के लिए बीसलपुर परियोजना का निर्माण किया गया है।

➤  राज्य के उत्तरी मरु भाग में हनुमानगढ़ व चुरु जिलों में सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से सिद्धमुख-नहर सिंचाई परियोजना शुरू की गयी है।

➤  नर्मदा नहर परियोजना में राजस्थान का हिस्सा 0.50 मिलियन एकड़ फीट है।

➤  इंदिरा गाँधी नहर परियोजना द्वारा हिमालय के पानी को राज्य के थार मरुस्थल में लाया गया है।

➤  इसका मुख्य उदेश्य रावी व व्यास नदियों के जल को पश्चिमी भाग में सिंचाई, पेयजल एवं अन्य उपयोग में लेने का है।

➤  इसका उद्गम पंजाब में सतलज-व्यास नदियों के संगम पर स्थित हरिके बैराज है।

➤  इसकी लम्बाई 649 किमी है।


राज्य की सिंचाई परियोजनाएँ


क्र. स.

परियोजना

जलापूर्ति

जिला

1.

नर्मदा परियोजना

सरदार सरोवर बांध (नर्मदा नदी)

बाड़मेर व जालौर

2.

सिद्धमुख-नोहर परियोजना

रावी व व्यास नदी

हनुमानगढ़

3.

जाखम परियोजना

जाखम नदी

चित्तौड़गढ़

4.

बीसलपुर परियोजना

बनास नदी

टोंक

5.

जवाई बाँध

जवाई नदी

पाली

7.

मेजा बांध

कोठारी नदी

भीलवाड़ा

8.

गुड़गाँव नहर

यमुना नदी

भरतपुर

9.

सोम कमला-अम्बा परियोजना

सोम नदी

डूंगरपुर

10.

पीपलदा लिफ्ट सिंचाई योजना

चम्बल नदी

सवाई माधोपुर

11.

सोम-कमला सिंचाई परियोजना

सोम व कमला नदी

डूंगरपुर


उम्मीद है यह 'राजस्थान में कृषि एवं पशुपालन' सामान्य ज्ञान लेख आपको पसंद आया होगा। इस आर्टिकल से आपको राजस्थान gk, राजस्थान GK इन हिंदी, Rajasthan General Knowledge in Hindi, Rajasthan Samanya Gyan, Rajasthan's agriculture and animal husbandry GK, राजस्थान सामान्य ज्ञान हिंदी इत्यादि की जानकारी मिलेगी। यदि आपके पास कोई प्रश्न या सुझाव है तो नीचे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते है।

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