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उत्तर प्रदेश की भाषाएं एवं बोलियां | Languages and Dialects of Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश की भाषाएं एवं बोलियां | Languages and Dialects of Uttar Pradesh

नमस्कार दोस्तों, Exams Tips Hindi शिक्षात्मक वेबसाइट में आपका स्वागत है। इस आर्टिकल में उत्तर प्रदेश की भाषाएं एवं बोलियां (Uttar Pradesh Languages and Dialects Related GK) दी गई है। जैसा कि हम जानते है, उत्तर प्रदेश, भारत का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। उत्तर प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत ज़्यादा कम्पटीशन रहता है। यह लेख उन आकांक्षीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो उत्तर प्रदेश सिविल सर्विस (UPPSC), UPSSSC, विद्युत विभाग, पुलिस, टीचर, सिंचाई विभाग, लेखपाल, BDO इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है। तो आइए जानते है उत्तर प्रदेश की भाषा एवं बोली से संबंधित जानकारी-


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उत्तर प्रदेश की भाषाएं एवं बोलियां | Languages and Dialects of Uttar Pradesh


➤ उत्तर प्रदेश भाषा के मामले में धनी प्रदेश रहा है। यहां हिंदी, उर्दू, संस्कृत, ब्रज भाषा, अंग्रेजी, बघेली, भोजपुरी, बुंदेली, कन्नौजी आदि भाषाएं बोली जाती हैं।

➤ उत्तर प्रदेश में हिंदी के अनेक महान लेखक पैदा हुए हैं। जैसे- भारतेंदु, हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद, महादेवी वर्मा, श्रीकांत वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, हरिवंश राय बच्चन, सुमित्रानंदन पंत, महावीर प्रसाद द्विवेदी आदि।

उर्दू में फिराक गोरखपुरी, जोश मलीहाबादी, अकबराबादी, इलाहाबादी, अली सरदार जाफरी, शकील बदायूंनी, वसीम बरेलवी आदि का नाम उल्लेखनीय है।


प्रदेश की क्षेत्रीय भाषाएं एवं बोलियां


उत्तर प्रदेश में निम्नलिखित भाषाएं एवं बोलियां प्रचलित हैं-

खड़ी बोली/कौरवी-इसका उद्भव शौरसेनी अपभ्रंश के उतरी रूप से हुआ है।

➤ इसका क्षेत्र सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, रामपुर तथा मुरादाबाद है।

➤ ब्रजभाषा का विकास शौरसेनी अपभ्रंश के मध्यवर्ती रूप से हुआ है। यह आगरा, मथुरा, अलीगढ़, धौलपुर, मैनपुरी, एटा, बदायूं, बरेली तथा उनके आसपास के क्षेत्रों में बोली जाती है।

➤ ब्रजभाषा कृष्ण भक्ति की एकमात्र भाषा है। लगभग सारा रीतिकालीन साहित्य ब्रजभाषा में लिखा गया है। यह हिंदी भाषा की सर्वाधिक महत्वपूर्ण बोली है। साहित्यिक महत्व के कारण ही इसे ब्रज बोली नहीं, ब्रजभाषा कहा जाता है। सूरदास, नंददास, रहीम, रसखान, बिहारी, मतिराम, भूषण, देव, भारतेंदु हरिश्चंद्र, जगन्नाथदास रत्नाकर' इत्यादि ब्रजभाषा के अमर कवि है।

➤ तुलसीदास जी ने भी अपनी कुछ रचनाएँ ब्रजभाषा में की हैं, जैसे कवितावली, विनय पत्रिका आदि।

➤ बुन्देली का विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है। उत्तर प्रदेश में इसका क्षेत्र, झांसी, हमीरपुर तथा उनके आसपास के क्षेत्र हैं।

➤ कन्नौजी का भी विकास शौरसेनी अपभ्रंश से हुआ है। इसके क्षेत्र इटावा, फर्रुखाबाद, शाहजहांपुर, कानपुर, हरदोई, पीलीभीत है।

➤ अवधी का उद्भव अर्द्धमागधी अपभ्रंश से हुआ है। इसके क्षेत्र लखनऊ, इलाहाबाद, फतेहपुर, मिर्जापुर (अंशतः), उन्नाव, रायबरेली, सीतापुर, खीरी, फैजाबाद, गोंडा, बस्ती, बहराइच, बाराबंकी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ आदि हैं।

➤ अवधी में साहित्य तथा लोक साहित्य पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। प्रबंध काव्य परंपरा का विकास विशेष रूप से अवधी में ही हुआ है। सूफी काव्य तथा रामभक्ति काव्य की रचना अवधी में हुई है।

➤ मुल्ला दाऊद, कुतुबन, मंझन, जायसी, तुलसीदास, नारायण दास, जगजीवन साहब, रघुनाथ दास, रामसनेही आदि इसके सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। अवधी में लिखा गया सर्वप्रसिद्ध ग्रंथ रामचरितमानस है। भारत के बाहर फिजी में अवधी बोलने वालों की संख्या अच्छी खासी है।

➤ भोजपुरी मागधी अपभ्रंश के पश्चिमी रूप से विकसित हुई है।

➤ उत्तर प्रदेश में बनारस, जौनपुर, मिर्जापुर, गाजीपुर, बलिया, गोरखपुर, देवरिया, आजमगढ़, बस्ती, तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में भोजपुरी बोली जाती है।

➤ भोजपुरी हिंदी की वह बोली है जिसमें सर्वाधिक फिल्में बनी हैं। वर्तमान में दूरदर्शन द्वारा इसके अनेक धारावाहिक प्रसारित हो रहे हैं।

➤ भोजपुरी अंतर्राष्ट्रीय महत्व की बोली है, भारत के बाहर सूरीनाम, फिजी, मॉरीशस, युगाना, त्रिनिदाद में इस बोली का प्रसार है।

➤ भिखारी ठाकुर को भोजपुरी का शेक्सपियर तथा भोजपुरी का भारतेंदु कहा जाता है।


उत्तर प्रदेश की राजभाषा

➤ अक्टूबर, 1947 में हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया। वर्ष 1968 में उत्तर प्रदेश की सरकार ने प्रदेश के सभी कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के प्रयोग को अनिवार्य बना दिया।

➤ उत्तर प्रदेश में हिंदी भाषा को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार की ओर से 10 करोड़ की लागत से वर्ष 1982 में भाषा निधि का गठन किया गया।

➤ वर्ष 1989 में प्रदेश की सरकार ने उर्दू भाषा को राज्य की द्वितीय राजभाषा घोषित किया।


उत्तर प्रदेश में भाषा संस्थान

➤ वर्ष 1976 में उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान को स्थापना पुरुषोत्तम दास टंडन के नेतृत्व में की गई थी।

➤ उत्तर प्रदेश संस्कृति संस्थान की स्थापना 30 दिसंबर, 1976 को की गई थी। इस संस्थान द्वारा प्रतिवर्ष वाराणसी में अखिल भारतीय संस्कृति समारोह का आयोजन किया जाता है।

➤ दिसंबर, 1991 में उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान की स्थापना की गई थी। वर्ष 2007 में इस संस्थान का पुनर्गठन किया गया।

➤ उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी की स्थापना वर्ष 1972 में की गई थी।

➤ उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी स्थापना वर्ष 1997 में की गई थी। इसी आधार पर पंजाबी भाषा अकादमी भी गठित की गई है।


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