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उत्तर प्रदेश के खनिज एवं उद्योग | Minerals and Industries of Uttar Pradesh

उत्तर प्रदेश के खनिज एवं उद्योग | Minerals and Industries of Uttar Pradesh


नमस्कार दोस्तों, Exams Tips Hindi शिक्षात्मक वेबसाइट में आपका स्वागत है। इस आर्टिकल में उत्तर प्रदेश के खनिज एवं उद्योग से संबंधित जानकारी (Uttar Pradesh Minerals, Uttar Pradesh Industries) दी गई है। जैसा कि हम जानते है, उत्तर प्रदेश, भारत का जनसंख्या की दृष्टि से सबसे बड़ा राज्य है। उत्तर प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं में बहुत ज़्यादा कम्पटीशन रहता है। यह लेख उन आकांक्षीयों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जो उत्तर प्रदेश सिविल सर्विस (UPPSC), UPSSSC, विद्युत विभाग, पुलिस, टीचर, सिंचाई विभाग, लेखपाल, BDO इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है। तो आइए जानते है उत्तर प्रदेश से संबंधित जानकारी-


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उत्तर प्रदेश के खनिज एवं उद्योग | Minerals and Industries of Uttar Pradesh

➤ खनिज की दृष्टि से उत्तर प्रदेश एक निम्न मध्यम श्रेणी का राज्य है। यहां विन्ध्यक्रम की शैलों बुंदेलखंडी क्षेत्रों, हिमालय श्रेणी के निचले भागों तथा कुछ नदी घाटियों में खनिज व उपखनिज पाये जाते हैं।

➤ 1955 में प्रदेश में खनिज संपदा की खोज, विकास एवं उद्योगों की स्थापना भू-तत्व एवं खनिज कर्म निदेशालय की स्थापना की गई। खनिज भंडारों पर आधारित उद्योग लगाने के उद्देश्य से 1974 में उत्तर प्रदेश राज्य खनिज विकास निगम की स्थापना की गई।

➤ दिसम्बर 1998 में प्रदेश की पहली खनिज नीति में घोषित की गई जिसमें खनिज विकास को उद्योग का दर्जा दिया गया।

➤ प्रदेश के 12 जिलों को इन नीति में खनिज बहुल क्षेत्र घोषित किया गया, जो इस प्रकार हैं, प्रयागराज, झांसी, जालौन, महोबा, सोनभद्र, चित्रकूट, सहारनपुर, मिर्जापुर, ललितपुर, चछौली, बांदा, हमीरपुर आदि।

➤ सोना व कोयले की खान सोनभद्र में प्रगति पर एस्बेस्टस की खोज झांसी में प्रगति पर है।

➤ बांदा में हीरे की खोज व ललितपुर में प्लेटिनम वर्ग के धातुओं की खोज की जा रही है।

➤ उत्तर प्रदेश में पाये जाने वाले प्रमुख खनिज राज्य में मिलने वाले प्रमुख खनिज बॉक्साइट, डायस्पोर, डोलोमाइट, जिप्सम, चूना पत्थर, मैग्नेसाइट, ओकार (गेरू), फास्फोराइट, फायरोफाइलाअट, सिलिका सैण्ड, गंधक व कोयला आदि हैं। मौरंग, बजरी, इमारती पत्थर, संगमरमर, सामान्य बालू, कंकड़, शोरा व लाइफस्ट स्टोन आदि प्रमुख उपखनिज है।


1. कोयला - उत्तर प्रदेश कोयले के भंडार की दृष्टि से देश में 8वां स्थान रखता है। यहां कोयला सोनभद्र के गोंडवाना पत्थरों में पाया जाता है। सोनभद्र के सिंगरौली क्षेत्र में प्राप्त कोयले का उपयोग ओबरा ताप विद्युत गृह और सिंगरौली संयंत्र में किया जाता है।


2. बॉक्साइट - यह एल्युमिनियम का मुख्य अयस्क है, जो कि प्रदेश के बांदा, चन्दौली व ललितपुर जनपदों में पाया जाता है। इस अयस्क के एलुमिनियम निकालने का काम रेणुकूट (सोनभद्र) में हिंडाल्को कंपनी द्वारा किया जा

रहा है।


3. चूना पत्थर - मिर्जापुर जिले के गुरुमा, कनाच, बाबू हारी एवं रोहतास क्षेत्रों तथा सोनभद्र के कजराहट क्षेत्र में उच्च श्रेणी का चूना पत्थर प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। मिर्जापुर के चुनार तथा सोनभद्र जिले में चुर्क तथा डल्ला सीमेंट फैक्ट्रियों क लिए चूना पत्थर इन्हीं स्थानों से उपलब्ध होता है। चूने पत्थर के संचित राशि की दृष्टि से प्रदेश का देश में दूसरा स्थान है।


4. डोलोमाइट - प्रदेश में उच्च स्तर का डोलोमाइट खनिज सोनभद्र में कजराहट क्षेत्र से प्राप्त होता है। इसका उपयोग इस्पात उद्योग में निस्सरण और रिफैक्टरीज (ताप सहय) बनाने के लिए किया जाता है। बांदा जिले में भी डोलोमाइट प्राप्त होता है। यह पोर्टलैंड सीमेंट, प्लास्टर ऑफ पेरिस तथा गंधक व तेजाब के निर्माण में भी प्रयुक्त किया जाता है।


5. सोना - प्रदेश में कुछ मात्रा में सोना शारदा और रामगंगा नदियों के रेतों में पाया जाता है। नवीन खोजों के अनुसार ललितपुर जिले के भीखमपुरा क्षेत्र तथा सोनभद्र के हरदी क्षेत्र में स्वर्ग खनिज होने की संभावना है


6. हीरा - प्रदेश में हीरा कुछ मात्रा में बांदा में मिलता है। मिर्जापुर के जंगल में भी कुछ हीरे मिले हैं। नवीन खोजों अनुसार बांदा के सीमावर्ती क्षेत्र (कालिंजर) में हीरे के व्यापक भण्डार होने की संभावना है।


7. तांबा - प्रदेश के ललितपुर जिले का सोनराई क्षेत्र तांबा उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है। तांबा मुख्यतः आग्रेय एवं परतदार चट्टानों में नसों के रूप में मिलता है।


8. कांच बालू (सिलिका सैंड)- कांच बालू के उत्पादन की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का देश में आंध्रा के बाद द्वितीय स्थान है। प्रदेश में गंगा तथा यमुना नदी से कांच बनाने योग्य सिलिका बालू प्राप्त किया जाता है। प्रदेश के प्रयागराज जिले के शंकरगढ़ एवं यमुना नदी क्षेत्र, चंदौली के चकिया क्षेत्र, झांसी व मुंडारी एवं बाला बहेट क्षेत्र तथा बांदा व चित्रकूट जिले के लोहागढ़, बरगढ़ एवं घन ढोल क्षेत्र से कांच बालू प्राप्त होता है। भूगर्भवेताओं के अनुसार प्रदेश में कांच बालू का सुरक्षित भंडार 10 करोड़ टन से भी अधिक है।


9. यूरेनियम - प्रदेश के ललितपुर जिले में यूरेनियम के सीमित भंडारों की खोज की गई है।


10. एस्बेस्टस - प्रदेश के मिर्जापुर व बड़ागांव क्षेत्र झांसी में एस्वेस्टम पाया जाता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से सीमेंट निर्माण एवं विद्युत उपकरणों में किया जाता है। इसमें ताप सहन करने एवं रासायनिक क्रिया से अधिक प्रभावित न होने की क्षमता होती है।


11. एण्डोलसाइट - मिर्जापुर व सोनभद्र में यह खनिज अधिक मात्रा में उपलब्ध है। इसमें लौह अंश अधिक है, किंतु अल्युमिना तथा क्षार अंश कम है। पोर्सिलेन तथा स्पार्क प्लग उद्योग में इसका उपयोग किया जाता है।


12. टाल्क या सेलखड़ी- प्रदेश के हमीरपुर और झांसी जिलों में सेलखड़ी खनिज के भंडार है। इसे स्टिएटाईट तथा सोप स्टोन के नाम से भी जाना जाता है। इसका उपयोग सौंदर्य प्रसाधन, टैल्कम पाउडर, कीटनाशक पाउडर, टेक्सटाइल तथा कागज आदि के निर्माण में किया जाता है।


13. संगमरमर - संगमरमर एवं अन्य इमारती पत्थर मिर्जापुर एवं सोनभद्र जिलों में पाये जाते हैं।


14. जिप्सम - जिप्सम राज्य क झांसी तथा हमीरपुर जिलों में पाया जाता है। इसका उपयोग मुख्यतः सीमेंट, गंधक तथा अमोनियम सल्फेट नामक रासायनिक पदार्थ के निर्माण में किया जाता है।


15. पाइरोफिलाइट - यह खनिज प्रदेश के झांसी, ललितपुर, महोबा व हमीरपुर जिलों में पाया जाता है। इसका उपयोग तापसह और सिरेसिम उद्योग में किया जाता है। इससे कीटनाशकों का भी निर्माण होता है।


16. फायर क्ले (नॉन प्लास्टिक)- प्रदेश में मिर्जापुर जिले के बांसी, मकरी एवं खोह क्षेत्र में गोंडवाना युग की चट्टानों में फायर क्ले के निक्षेप पाए गए हैं।


➤  उत्तर प्रदेश मुख्यतः कृषि प्रधान राज्य है और वहां की लगभग 59.3 प्रतिशत जनसंख्या कृषि कायों में संलग्न है। राज्य के आर्थिक सर्वोक्षण  2017-18 के अनुसार वर्ष 2016-17 में प्रदेश की अर्थव्यवस्था में उद्योग (द्वितीयक क्षेत्र) का योगदान 24 प्रतिशत था। वहां कृषि आधारित उद्योगों को विकास हुआ है, वहीं गैर-कृषि उद्योगों काविकास कम हुआ है। राज्य में औद्योगिक दृष्टि से सबसे ज्यादा विकसित पश्चिमी क्षेत्र है। गौतमबु( नगर, गाजियाबाद, कानपुर, जौनपुर, लखनऊ, अलीगढ़, आगरा आदि राज्य के प्रमुख औद्योगिक नगर है।

➤  पंजीकृत कारखानों की संख्या की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का तमिलनाऊ, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश व गुजरात के पश्चात् पांचवां स्थान है।


उत्तर प्रदेश के प्रमुख उद्योग 

प्रमुख उद्योगों को कृषि एवं वन आधारित उद्योग, वस्त्र उद्योग तथा खनिज आध पारित उद्योगों में बांटा जा सकता है।


उत्तर प्रदेश में कृषि एवं वन आधारित उद्योग

राज्य के कृषि एवं वन आधारित उद्योगों का वर्णन निम्न है।


राज्य के वस्त्र उद्योग

➤  वस्त्र उद्योग के अंतर्गत सूती वस्त्र उद्योग, ऊनी वस्त्र उद्योग और रेशम वस्त्र उद्योग प्रमुख सूती वस्त्र उद्योग सूती वस्त्र उद्योग (हथकरघा व मिलें और दृष्टि) में उत्तर प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है।

➤  राज्य में सूती वस्त्र मिलें मुख्यतः कानपुर, आगरा, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, हरदोई, हाथरस, अलीगढ़, गाजियाबाद, हरदोई, हाथरस, अलीगढ़, सहारनपुर, बदायूं, प्रयागराज, मऊ, वाराणसी, रामपुर, मुरादाबाद, मोदीनगर, मिर्जापुर एवं उझानी में केंद्रित है।

➤  कानपुर में सर्वाधिक मिलें है। तथा इसे उत्तर प्रदेश भारत का मैनचेस्टर कहा जाता है।

➤  लखनऊ किचन की कढ़ाई के लिए, सीतापुर दरियों के लिए गाजीपुर कटवर्क के लिए व गाजियाबाद ट्रीटवेल के लिए विख्यात हैं।


हथकरघा उद्योग

➤ यह राज्य का सर्वाधिक बड़ा उद्योग है। प्रदेश का सूती वस्त्र करघा उद्योग रोजगार उपलब्ध कराने के दृष्टिकोण से कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा उद्योग है। देश के कुल हथकरघा उद्यमियों का 1/4 हिस्सा उत्तर प्रदेश में ही है।

➤ राज्य में कालीन व दरियां बनवाने का कार्य मथुरा, बरेली, मिर्जापुर, भदोही, सीतापुर व अलीगढ़ में किया जाता है।

➤ ऊनी वस्त्र उद्योग कानपुर में देश के प्रथम आधुनिक ऊनी वस्त्र कारखाने की स्थापना 1876 ई. में की गई थी।

➤ इस उद्योग के प्रमुख केंद्र कानपुर और मिर्जापुर हैं। कानपुर में स्थित लाल इमली मिल ऊनी वस्त्र उद्योग के लिए प्रसिद्ध है। परंतु यह मिल वर्तमान में बंद है।

➤ छींट एवं लिहाफों की छपाई पुरर्फखाबाद, जहांगीराबाद, पिलखुआ एवं मथुरा में होती है। कम्बल मुजफ्फरपुर नगर, नजीबाबाद तथा लावड़ (मेरठ) में बनाए जाते हैं।


रेशम वस्त्र उद्योग

➤ इस उद्योग के प्रमुख केंद्र वाराणसी, कानपुर, इटावा एवं मोदीनगर है।

➤ राज्य में 50.75 मी. टन रेशम का उत्पादन प्रतिवर्ष किया जाता है। प्रदेश में कुल रेशम उत्पादन में सर्वाधिक योगदान शहतूती रेशम का है। इसके अतिरिक्त राज्य में टसर, ईरी और अरण्डी रेशम का भी उत्पादन होता है।

➤ वाराणसी में निर्मित रेशमी साड़ियां अपनी गुणवत्ता के लिए विश्व विख्यात है।

➤ मथुरा में मलमल पर छपाई का कार्य किया जाता है।

➤ राज्य में रेशम उत्पादन में वृद्धि( के लिए वर्ष 1992 में आदेशित कॉपरेटिव सेरीकल्चर फेडरेशन का गठन किया गया।

➤ उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई अनुसंधान और विकास केंद्र भी स्थापित किए गए हैं।


चीनी उद्योग

➤ चीनी उत्पादन में उत्तर प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है। यहां देश के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 39 प्रतिशत उत्पादित किया जाता है।

➤ राज्य में प्रथम चीनी मिल की स्थापना वर्ष 1909 में प्रतापपुर (देवरिया) में की गई थी।

➤ प्रदेश में चीनी की मिलें मुख्यतः गोरखपुर, देवरिया, गाजियाबाद मेरठ, कानपुर, शाहजहांपुर, लखनऊ, वाराणसी, फैजाबाद, प्रयागराज, (प्रयागराज), बस्ती एवं बरेली में है।

➤ वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 44 गन्ना उत्पादक मिलें और 9 गन्ना उत्पादक परिक्षेत्र है।

➤ गन्ना उत्पादक परिक्षेत्रों में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, फैजाबाद, देवीपाटन, गोरखपुर और देवरिया शामिल हैं।

➤ इसके अतिरिक्त 3 चीनी परिक्षेत्र मेरठ, लखनऊ और बरेली है।

➤ गुड़ उत्पादन में भी राज्य का प्रथम स्थान है।

➤ प्रदेश में गुड़ के प्रमुख उत्पादन केंद्र सीतापुर, बरेली, मेरठ और मुजफ्फरनगर है।

➤ उत्तर प्रदेश सहकारी चीनी मिल संघ की स्थापना वर्ष 1963 में तथा उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम लिमिटेड की स्थापना वर्ष 1971 में की गई।

➤ उत्तर प्रदेश गन्ना किसान संस्थान की स्थापना वर्ष 1975 में लखनऊ में की गई। इसका उद्देश्य प्रदेश के कृषकों को गन्ने की खेती, चीनी उद्योग संबंधी तकनीकी आदि में प्रशिक्षण है।


उत्तर प्रदेश में खनिज आधारित उद्योग

राज्य के खनिज आधारित उद्योगों का वर्णन निम्न है।


कांच उद्योग

➤ कांच उद्योग में उत्तर प्रदेश का देश में प्रमुख स्थान है। यहां चूड़ियां, बोतलें, गुलदस्ते, कांच के बर्तन इत्यादि बनाए जाते हैं।

➤ इसके प्रमुख केंद्र फिरोजाबाद, बहजोई, नैनी मेरठ, गाजियाबाद, वाराणसी, लखनऊ, सासनी, शिकोहाबाद तथा हाथरस है।

➤ फिरोजाबाद चूड़ियों का विश्व प्रसिद्ध (निर्माण केंद्र है। इसे सुहाग नारी भी कहा जाता है।


एल्युमीनियम उद्योग

➤  एल्युमीनियम का उपयोग हवाई जहाज बनाने, बर्तन बनाने और तार बनाने में प्रमुख रूप से किया जाता है।

➤  राज्य में इस उद्योग का केंद्र सोनभद्र जिले का रेणुकूट है। यहां हिंदुस्तान एलुमिनियम कार्पोरेशन लिमिटेड का कारखाना स्थित है। इसके द्वारा एल्यूमीनियम के पिंड एवं चादरों का निर्माण किया जाता है।


रासायनिक उद्योग

➤ इस उद्योग के अंतर्गत मुख्य रूप से गंधक का तेजाब, हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, सोडा ऐश, अमोनिया, ब्लीचिंग पाउडर, दवाइयां, रंग-रोगन आदि का निर्माण किया जाता है।

➤ गंधक का तेजाब एवं बायो सल्फाइड का केंद्र कानपुर में स्थित है।

➤ लौह गुणों से युक्त सिलिका बालू तैयार करने के कारखाने प्रयागराज में स्थित है।

➤ इसके अतिरिक्त सोडा एश (वाराणसी) अमोनियम क्लोराइड (वाराणसी), कृत्रिम रबर (बरेली) आदि राज्य के रासायनिक उद्योग केंद्र हैं।


सीमेंट उद्योग

➤ राज्य में सीमेंट उद्योग के कारखाने चुर्क व इल्ल (सोनभद्र), चुनार व कजरघाट (मिर्जापुर), दादरी (गौतम बुद्ध नगर), रायबरेली, झांसी, जगदीशपुर (अमेठी) में स्थित है।


उर्वरक उद्योग

प्रदेश में मुख्यतः दो प्रकार के उर्वरकों नाइट्रोजन (मूलतः यूरिया) और फास्फोरस का उत्पादन किया जाता है।

उत्तर प्रदेश में यूरिया खाद बनाने के प्रमुख कारखाने गोरखपुर, कानपुर, बरेली तथा प्रयागराज में है।


कागज उद्योग

➤ उत्तर प्रदेश का प्रथम कागज कारखाना लखनऊ में वर्ष 1979 में स्थापित किया गया था।

➤ कागज की मिलें सहारनपुर, कानपुर, मेरठ, (प्रयागराज) मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, मुरादाबाद एवं लखनऊ में केंद्रित हैं।

➤ सर्वाधिक कागज की मिलें मुजफ्फरनगर में है।


लकड़ी व फर्नीचर उद्योग

➤ राज्य में मुख्यतः लकड़ी व फर्नीचर उद्योग का कार्य हाथरस, सहारनपुर, बरेली और वाराणसी में होता है।

➤ लकड़ी पर उत्कृष्ट श्रेणी की नक्काशी का कार्य सहारनपुर एवं नगीना किया जाता है।

➤ लखनऊ व वाराणसी में लकड़ी के आकर्षक खिलौने बनाए जाते हैं।

➤ बेंत व छड़ियों बनाने का कार्य बरेली में किया जाता है।

➤ खेल का सामान मुख्य रूप से मेरठ व आगरा में बनाया जाता है।


उत्तर प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक निगम व संस्थान


उद्यमिता विकास संस्थान - इसकी स्थापना वर्ष 1986 में की गई। इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है।


उत्तर प्रदेश राज्य हथकरघा निगम - इसका गठन राम सहाय आयोग की संस्तुतियों के आधार पर 9 जनवरी, 1973 को कानपुर में किया गया है।


उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड - इसकी स्थापना वर्ष 1958 में की गई, जिसके 6 क्षेत्रीय कार्यालय कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, बरेली एवं गाजियाबाद है।


प्रदेशीय औद्योगिक व पूंजी निवेश निगम - इसकी स्थापना वृहद एवं मध्यम उद्योगों को दीर्घकालीन देने के लिए वर्ष 1972 में लखनऊ में की गई।


उत्तर प्रदेश निर्यात निगम - इसकी स्थापना 20 जनवरी, 1966 को की गई। इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है।


उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड-  इसकी स्थापना वर्ष 1960 में की गई।


उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स निगम लिमिटेड (अपट्रॉन) - इसकी स्थापना वर्ष 1976 में पिकप की एक सहायक कंपनी के रूप में लखनऊ में की गई थी।


उत्तर प्रदेश राज्य वस्त्र निगम- इसकी स्थापना वर्ष 1969 में की गई। सरकारी कंपनी के रूप में स्थापित इस निगम को वर्ष 1973 में पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में परिवर्तित कर दिया गया है।


उत्तर प्रदेश के औद्योगिक प्राधिकरण - उत्तर प्रदेश के औद्योगिक प्राधिकरणों का विवरण इस प्रकार है- 


नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा)-  की वर्ष 1976 में स्थापना की गई। इसकी स्थापना का मूल उद्देश्य उत्तर प्रदेश राज्य के औद्योगीकरण में तीव्रता लाना तथा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अति स्पर्धात्मक दरों पर उद्यमियों को आकर्षित करना था।


नोएडा में स्थित सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया- देश का दूसरा सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर निर्यातक क्षेत्र है।


वृहदू नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण - (ग्रेटर नोएडा) वर्ष 1991 में उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास अधिनियम के तहत वृहद् नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के पास उत्कृष्ट नगर बसाना है। इसमें वर्ष 2021 तक का मास्टर प्लान बनाना गया है, जिसमें 26 प्रतिशत क्षेत्र हरियाली में भरपूर होगा।


लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण - इसकी स्थापना लखनऊ एवं उन्नाव के मध्य वर्ष 2005 में की गई। इसका मुख्यालय लखनऊ में स्थित है।


गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण - प्रदेश के गोरखपुर क्षेत्र में वर्ष 1988 में तीव्रगति से औद्योगिक विकास हेतु गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण की स्थापना की गई। इसके अंतर्गत न्यू गोरखपुर आवासीय योजना के साथ-साथ ट्रांसफोर्ट नगर, ऐपेरल पार्क एवं टेक्सटाइल पार्क की स्थापना की गई।


उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण - इस प्राधिकरण का गठन दिसंबर, 2007 में किया गया था। इसका गठन एक्सप्रेस वे परियोजनाओं के लिए किया गया है।


नवीन औद्योगिक नीति 2012 - 29 सितंबर, 2012 को उत्तर प्रदेश सरकार ने नवीन औद्योगिक नीति की घोषणा की। जिसके तहत राज्य में लगने वाली औद्योगिक इकाइयों के विकास हेतु अपने पड़ोस के राज्यों के समान ही उद्योगों को प्रोत्साहन देने का निर्णय लिया गया है।


नई खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नीति, 2012 - राज्य की नई खाद्य असंस्करण उद्योग नीति, 2012 को उत्तर प्रदेश सरकार ने 20 नवंबर, 2012 को मंजूरी दी है। नीति में मशीनरी, प्लांट तथा तकनीकी सिविल कार्य पर न्यूनतम 25 लाख का पूंजी निवेश करने वाली नई खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए बाजार विकास व ब्रांड प्रोत्साहन के लिए नई रियायतों व अनुदानों की व्यवस्था की गई है।

इस नीति के तहत राज्य में उत्पादित प्रसंस्कृत उत्पाद के निर्यात की प्रोत्साहित करने के लिए एयरपोर्ट व समुद्री पोर्ट तक उत्पाद परिवहन पर होने वाली वास्तविक व्यय का 25 प्रतिशत तक (एक लाख रुपये प्रति लाभार्थी प्रतिवर्ष की अधिकतम सीमा) तीन वर्ष के लिए अनुदाय दिया जाएगा।


उत्तर प्रदेश औधोगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति, 2017-  इस नीति के तहत उद्देश्य राज्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करना है।

इस नीति से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य निम्न हैं

➤ प्रदेश में उद्योग अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराना और समावेशी रोजगार उपलब्ध कराना।

निवेश और रोजगार की लिंक करना।

➤ प्रक्रियाओं का सरलीकरण और सम्यक् स्वीकृतियों का सुनिश्चित किया जाना और मुख्यमंत्री कार्यालय के अंतर्गत एक समर्पित सिंगल विंडो क्लीयरेंस विभाग का गठन।

➤ 'मेक इन इंडिया' की सफलता से लाभ उठाने के उद्देश्य से मेक इन यूपी विभाग की स्थापना मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना के तहत प्रदेश के शिक्षित बेरोजगार युवाओं को प्रोत्साहन।

➤ एक लघु व मध्यम उद्यम चेंचर कैपिटल फंड को सृजन करना आदि।


उत्तर प्रदेश में उद्योग

वर्तमान स्थिति के अनुसार उत्तर प्रदेश में कुल 12 संचालित विशेष आर्थिक क्षेत्र (Operational SEZs) हैं। संचालिक विशेष आर्थिक क्षेत्र (Operational SEZs) इस प्रकार हैं-

1. नोएडा विशेष आर्थिक क्षेत्र, नोएडा

2. मपुरादाबाद SEZs, मपुरादाबाद

3. एच.सी.एपल, टेक्नालोजीस, नोएडा

4. मोसर बेयर, ग्रेटर नोएडा

5. विप्रो लिमिटेड, ग्रेटर नोएडा

6. सी व्यू डेवलपर्स लिमिटेड, नोएडा

7. एनआईआईटी टेक्नालॉजीस, नोएडा

8. आचविस सॉफटेक, नोएडा

9. अंसल आईटी सिटी एंड पार्क्स लि., ग्रेटर नोएडा

10. आशिया नार्दर्न एफटीडब्ल्यूजेड लि., खुर्जा बुलंदशहर

11. अर्थ इंप्रफाटेक प्रालि. ग्रेटर नोएडा

12. एच.सी.एल. आईटी सिटी लखनऊ प्राइवेट लि. लखनऊ


उत्तर प्रदेश खनन नीति, 2017

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल द्वारा 30 मई, 2017 को सुशासन (Good Governance) एवं भ्रष्टाचार मुक्त के मूल मंत्रों पर आधारित एक सुदृढ़ एवं पारदर्शी खनन नीति (उत्तर प्रदेश खनन नीति, 2017) के प्रख्यापन को मंजूरी प्रदान की गई। राज्य सरकार की इस खान नीति के प्रमुख मंत्र हैं।

(a) पारदर्शिता, (b) कानून का राज, (c) समता, (d) प्रभावशीलता, (e) आम सहमति, (f) उत्तरदायी एवं (g) भागीदारी।

लक्ष्य-नीति के तहत उपर्युक्त मंत्रों के आधार पर निम्नलिखित लक्ष्यों को प्राप्त किया जाता

(i) खनिजों के विषय में जागरूकता (Awareness) को बढ़ावा।

(i) सर्व सामान्य की खान एवं खनिजों तक पहुंचे (Accessibility) को सुनिश्चित करना।

(iii) सर्व सामान्य को खनिजों की उपलब्धता (Availability) में वृद्धि करना।

(iv) खनिजों के मूल्य को जन साधारण के सामर्थ्य के अनुरूप (Affordability) बनाए

रखना तथा (v) उपर्युक्त आधारों पर जनसाधारण में खनिजों की स्वीकार्यता (Acceptability) को बढ़ाना।


खनन नीति के उद्देश्य

(1) सामाजिक व आर्थिक सतत विकास (Sustainable Socio-Economic Development) की गति को तीव्र करना।

(ii) खनिजों का संरक्षण (Mineral Conservation) करना।

(iii) पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (Environment and Ecology) का संतुलन बनाए रखना।

(iv) खनिजों से प्राप्त राजस्व के राज्य के कुल राजस्व प्राप्ति में अंश को 1.80 प्रतिशत को बढ़ाकर आगामी 5 वर्षा में 3 प्रतिशत करना।

(v) अवैध खनन परिवहन पर नियंत्रण

(vi) खनिज क्षेत्र में रोजगार के अवसर करना

(vii) खनिज उद्योग में स्वच्छ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन।

(viii) खनिजों के वैज्ञानिक विकास हेतु तकनीकी ज्ञान सुविधाएं तथा परामर्श उपलब किराना।


उत्तर प्रदेश की औद्योगिक स्थिति


➤ उत्तर प्रदेश उद्योगों की दृष्टि से एक मध्यम श्रेणी का राज्य है। यहां खनिजों, अवस्थापना सुविधाओं तथा पूंजी निवेश की कमी के कारण गैर कृषि आधारित उद्योगों का विकास कम हुआ है, जबकि कृषि आधारित उद्योगों तथा लघु एवं कुटीर उद्योग का विकास अधिक हुआ है। सूती वस्त्र, चीनी, वनस्पति तेल आदि प्रदेश के कृषि आधारित उद्योग हैं। सीमेंट, ऊनी कपड़ा, चमड़ा, शराब, कागज, रासायनिक पदार्थ, कृषि उपकरण तथा कांच आदि राज्य के अन्य प्रमुख उद्योग हैं।

➤ प्रथम पंचवर्षीय योजना से लेकर 11 वीं योजना तक राज्य में औसत औद्योगिक विकास दर क्रमशः 2.3, 1.7, 5.7, 3.4, 9.4, 11.8, 10. 9, 4.2, -4.3, 6.6 व 4.4 प्रतिशत रही है। 12वीं योजना में 11.2 प्रतिशत का लक्ष्य रखा गया है।

➤ सितंबर, 2012 में राज्य सरकार द्वारा घोषित नई अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति- 2012 में 11.2 प्रतिशत वार्षिक की औद्योगिक विकास दर प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

➤ प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षिक करने के साथ ही इसमें पूर्वांचल, बुंदेलखंड व मध्यांचल को विशेष महत्व प्रदान किया गया है ताकि इन क्षेत्रों का औद्योगीकरण की गति नोएडा व ग्रेटर नोएडा जैसी हो सके।

➤ इस नीति में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की गई हैं, यथा- निवेश प्रोत्साहन योजना, नयी पूंजी ब्याज उपादान योजना, अवस्थापना उपादान याजना, ईपीएपफ योजना आदि।

राज्य में औद्योगिक दृष्टि से सर्वाधिक विकसित पश्चिमी क्षेत्र है, फिर क्रमशः केंद्रीय, पूर्वी व बुंदेलखंड क्षेत्र हैं। राज्य के प्रमुख उद्योगों का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है-


सूती वस्त्र/हथकरघा उद्योग

➤ यह प्रदेश का सबसे बड़ा उद्योग है। सूती वस्त्र उद्योग (हथकरघा एवं मिले) की दृष्टि से उत्तर प्रदेश का भारत में तीसरा स्थान है। यहां का हथकरघा उद्योग कृषि के बाद रोजगार उपलब्ध कराने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है। देश के कुल हथकरघा उद्यमियों के एक चौथाई यहां पाये जाते हैं।

➤ उत्तर प्रदेश बहुत पहले से अपने कलात्मक कपड़ों के लिए प्रसिद्ध रहा है। जैसे- वाराणसी की सिल्क साड़ियां, सीतापुर की दरिया, गाजीपुर का कटवर्क पर्दा, अमरोहा का पाइल वर्क, गोरखपुर का बेड कवर, गाजियाबाद का टेरीटावेल आदि।

➤ प्रदेश में सूती वस्त्र की मिले, कानपुर, आगरा, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, टांडा, हरदोई, हाथरस, अलीगढ़, सहारनपुर, बदायूं, प्रयागराज, मऊ, वाराणसी, रामपुर, मुरादाबाद, मिर्जापुर, मोदीनगर और उझानी आदि शहरों में है।

➤ कानपुर उत्तर भारत का मैनचेस्टर कहलाता है। यहां सूती वस्त्रों की 10 से अधिक मिलें हाथ से कपड़े बनाने का कार्य मुख्यतः बनारस, मऊ, बिलासपुर, संडीला, लखनऊ, गोरखपुर, मगहर, फर्रुखाबाद, मथुरा, रामपुर, मिर्जापुर, अलीगढ़, आगरा, टांडा, बाराबंकी, अमरोहा, मुबारकपुर, देवबंद, सिकंदराबाद, धामपुर, इटावा, अमरोहा, आदि नगरों में किया जाता है। बनारस की रेशमी साड़ियां लखनऊ के चिकन व रामपुर के जरी-दरदोजी विश्वविद्यालय हैं।

➤ कम्बल मुज़फ्फरनगर, नजीबाबाद और लावड़ (मेरठ) में बनाए जाते हैं।

➤ छींट व लिहाफों की छपाई का कार्य फर्रुखाबाद, जहांगीराबाद, पिलखुआ और मथुरा में होता है। मथुरा में मलमल पर छपाई का काम होता है।

➤ प्रदेश में लगभग 6.64 लाख बुनकर इस उद्योग से जीविकोपार्जन करते हैं।


1. महात्मा गांधी बुनकर बीमा योजना- भारत सरकार द्वारा यह योजना 2008-09 में लागू की गई। इस योजना का उद्देश्य 18 से 59 वर्ष के बुनकरों को बीमा सुरक्षा प्रदान करना है। योजनार्तगत बुनकर को वर्ष भर में मात्र 333 रुपये का प्रीमियम पर 60 हजार, दुर्घटनावश मृत्यु पर 1.5 लाख व पूर्ण अपंगता पर 1.5 लाख रुपए मिलते हैं। इस योजना के अंतर्गत बीमित परिवारों के दो बच्चों के लिए शिक्षा सहयोग योजना भी संचालित है।


2. एकीकृत हथकरघा विकास योजना - भारत सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य बुनकरों, व्यापारी, मास्टर वीयर, निर्यातक, ट्रेडर्स, यार्न व केमिकल आपूर्तिकर्ता आदि सभी को समूह एवं क्लस्टर के रूप में एक-दूसरे से लिंक स्थापित कर अपना समस्त कार्य अपने द्वारा गठित संस्था के माध्यम से स्वयं कर अपनी समस्याओं का निराकरण कर इस उद्योग का विकास करना है। इस योजना के तहत 2005-06 में 3, 2006-07 में 10, 2007-08 में 14, 2008-09 में 11, 2009-10 में 8 तथा 2010-11 में 7 क्लस्टरों का चयन किया गया।


3. दीनदयाल बुनकर विकास योजना - केंद्र और राज्य सरकार के 50-50 के सहयोग से हथकरघा से संबंधित आधारभूत इनपुट में सहायता के लिए यह योजना 2000-01 में चलायी जा रही है।


4. जनश्री बीमा योजना-  हथकरघा एवं पावरलूम बुनकरों को लाभान्वित करने के उद्देश्य से 2002 में घोषित यह योजना 2003-04 से लागू है। इस योजना में 18 से 60 वर्ष के बुनकरों को शामिल किया गया है।


उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग

➤ विश्व में प्राकृतिक रेशम का सबसे बड़ा उत्पादक चीन है। भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।

➤ विश्व में रेशम की कुल चार किस्में (शहतूती, टसर, अरण्डी तथा मूंगा) पायी जाती है। इन चारों किस्मों का भारत में उत्पादन होता है और मूंगा रेशम का उत्पादन केवल भारत में होता हैं।

➤ उत्तर प्रदेश में शहतूती, टसर व एरी रेशम का उत्पादन होता है। शहतूती रेशम कीट का भोज्य शहतूत पत्ती, टसर रेशम कीट का आहार अर्जुन व आसन की पत्ती तथा एरी रेशम कीट का आहार अरण्डी की पत्ती है।

प्रदेश में लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, बहराइच आदि 55 जिलों में शहतूती, टसर व एरी रेशम का उत्पादन किया जाता है।

➤ सोनभद्र, बहराइच, चंदौली, लखीमपुर आदि सहित राज्य के 13 जिलों में कुल 164 शहतूती उद्यान फार्म है।

राज्य के सोनभद्र, चंदौली, मिर्जापुर, बांदा, चित्रकूट, महोबा, जालौन, झांसी, सुल्तानपुर, मथुरा आदि 59 जिलों में टसर रेशम विकास योजना चलाई जा रही है।

➤ एरी रेशम विकास योजना राज्य के फतेहपुर, कानपुर नगर, कानपुर देहात, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, जालौन आदि 8 जिलों में चलाई जा रही है।

➤ उत्तर प्रदेश में लगभग 50 से 75 मी. टन/वार्षिक रेशम का उत्पादन किया जाता है। लेकिन खपत लगभग 5000 मी. टन वार्षिक है जो कि देश के कुल रेशम खपत का लगभग 50 प्रतिशत है। अतः आयात करना पड़ता है।

➤ प्रदेश के कुल रेशम उत्पादन में शहतूती रेशम का सर्वाधिक योगदान है। फिर क्रमशः टसर व एरी का है।

➤ प्रदेश में रेशम का ज्यादातर काम वाराणसी, मऊ, मुबारकपुर, इटावा आदि जिलों में होता है। वाराणसी की रेशम साड़ियां विश्व में प्रसिद्ध हैं।

➤ रेशम उत्पादन में वृद्धि के लिए 1992 में प्रादेशिक कोआपरेटिव सेरीकल्चर फेडरेशन का गठन किया गया।

➤ प्रदेश में शहतूती रेशम का अनुसंधान व विकास कार्य रेशम अनुसंधान एवं विकास केंद्र सुभागपुर (गोंडा) टसर रेशम का अनुसंधान व विकास केंद्र सोनभद्र द्वारा एरी रेशम का विकास व अनुसंधान कार्य रेशम अनुसंधान एवं विकास  केंद्र कानपुर नगर द्वारा कराया जा रहा है।


उत्तर प्रदेश में चीनी उद्योग

➤ गन्ना राज्य का महत्वपूर्ण नकदी फसल है। अपने प्रदेश में गन्ने का क्षेत्रफल पूरे देश का लगभग 50 प्रतिशत है। राज्य में 30 लाख से अधिक लोगों का इस क्षेत्र में रोजगार मिला हुआ है। गंगा-यमुना दोआब चीनी उत्पादन का महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इस क्षेत्र में प्रदेश के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 65 प्रतिशत चीनी उत्पादित किया जाता है। शेष चीनी का उत्पादन पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में होता है। यह भारतीय मूल का पौधा है। पहले इसमें केवल गुड व राब आदि बनाया जाता था।

➤ गन्ने की अच्छी पैदावार को देखते हुए अंग्रेजों ने 1903 में प्रतापपुर (देवरिया) में भारत की पहली चीनी मिल स्थापित की गई थी।

➤ राज्य में गन्ना विकास कार्यक्रमों का सफल बनाने के लिए 1948-19 में कई गन्ना विकास समितियों का गठन किया गया और उनको रचनात्मक योगदान देने के लिए उत्तर प्रदेश सहकारी गन्ना समिति संघ लि. की स्थापना 1949 में की गयी।

➤ उत्तर प्रदेश गन्ना विकास संस्थान की स्थापना 1975 में लखनऊ में गन्ने की खेती, चीनी उद्योग संबंधी तकनीकों आदि में प्रशिक्षण देने के लिए की गई। वर्तमान में इसका नाम लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान है।

➤ इसके गोरखपुर, वाराणसी, शाहजहांपुर, गोंडा (रज्जनपुर) तथा मुजफ्फरनगर आदि 5 जिलों में शाखा प्रशिक्षण केंद्र है।

➤ गन्ने के विभिन्न पहलुओं पर शोध हेतु 1976-77 में उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद का गठन किया गया। इसके अंतर्गत प्रदेश में 9 गन्ना शोध केंद्र व बीज संवर्धन प्रक्षेत्र क्रमशः मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, खीरी, कुशीनगर, गाजीपुर, सुल्तानपुर तथा बलरामपुर में है।

➤ वर्तमान में राज्य में 44 गन्ना उत्पादक जिले व कुल 9 (मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बरेली, लखनऊ, अयोध्या, देवीपाटन, गोरखपुर व देवरिया) गन्ना उत्पादक परिक्षेत्र व 3 (मेरठ, बरेली, लखनऊ) चीनी परिक्षेत्र हैं। राज्य में वर्तमान में लगभग 100 चीनी मिल निजी क्षेत्र में हैं


अवस्थापना सुविधाएं

➤ प्रदेश में उद्योग निदेशालय द्वारा 56 जिलों मेंनकुल 248 (80 वृहद 4 168 लघु) आयोग संस्थान की स्थापना की गई है। जिनमें से  राज्य औद्योगिक विकास निगम द्वारा 138 औद्योगिक क्षेत्रों की स्थापना किया गया है। रा.औ.वि. निगम द्वारा उत्पादन विशेष हेतु कई इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किये गये हैं। प्रमुख इस प्रकार हैं-

एपैरल (टेक्सटाइल) व होजरी पार्क, कानपुर आई.टी. आई.टी.एस. हेत ट्रोनिका सिटी, कानपुर व गाजियाबाद

ट्रोनिका सिटी, गाजियाबाद में एपैरेल पार्क।

➤ कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु एग्रो पार्क कुर्सी रोड (बाराबंकी) व कर खिंचाव (वाराणसी) बंथरा (उन्नाव) में चर्म प्रौद्योगिकी पार्क।

➤ आगरा में लेदर पार्क की स्थापना।

➤ चर्म प्रोडक्ट निर्यात हेतु निर्यात संवर्धन औद्योगिक पार्क, आगरा में स्थापित है।

➤ एग्रो प्रोसेसिंग जोन हापुड़, लखनऊ, वाराणसी, व सहारनपुर।

➤ लखनऊ व वाराणसी में एग्रो पार्क।

➤ प्लास्टिक उद्योगों हेतु प्लास्टिक सिटी कानपुर देहात व औरैया में।

➤ आगरा में शिल्प वस्तुओं हेतु शिल्प ग्राम।

➤ कानपुर व उन्नाव के बीच निकिडा सिटी।

➤ इलेक्ट्रॉनिक सिटी नोएडा व आगरा में।

➤ सण्डीला (हरदोई) व रमईपुर (कानपुर) में मेगा लेदर क्लस्टर।

➤ उन्नाव में ट्रांस गंगा परियोजना।

➤ मुरादाबाद में मुरादाबाद विशेष आर्थिक जोन।

➤ आगरा में गौतम बुद्ध नगर में निर्यात प्रोत्साहन औ. पार्क।

➤ निगम द्वारा आवासीय, व्यावसायिक एवं औद्योगिक भूखंडों को समेकित रूप से उपलब्ध कराने हेतु बिजौली (झांसी), शाहजहांपुर, दिबियापुर (औरैया) तथा मुरादाबाद में ग्रोथ सेंटर खोले गये हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गोरखपुर, लखनऊ, सतहरिया (जौनपुर) तथा भदोही में इंडस्ट्रियल टाउन विकसित किये गये हैं।


औद्योगिक विकास प्राधिकरण

प्रदेश के औद्योगिक विकास में तीव्रता लाने के लिए 6 औद्योगिक विकास प्राधिकरणों की स्थापना की गई है।

यथा

1. नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (नोएडा)- प्रदेश के औद्योगिक में तीव्रता लाने तथा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए नोएडा की स्थापना 1876 में की गई।


2. वृहद नवीन ओखला औद्योगिक विकास प्राधिकरण (ग्रेटर नोएडा) - प्रदेश शासन द्वारा नोएडा के सफल प्रयोग के बाद 117 गांवों को अधिग्रहित करके 1991 में ग्रेटर नोएडा फेज-1 व 14 जून 2006 को 167 गांवों को ले कर फेज-2 की स्थापना की गई। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के पास उत्कृष्ट नगर बसाना है, जिसे आर्ट ऑफ लिविंग भी कहा जा सके।


3. सतहरिया औद्योगिक विकास प्राधिकरण (सीडा) - सीडा का गठन 1989 में किया गया। यह जौनपुर के मछली शहर तहसील के ग्राम सतहरिया तथा उसके आसपास के 37 गांवों के 508 एकड़ क्षेत्र में स्थापित है।


4. गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) - गोरखपुर परिक्षेत्र के तीव्र औद्योगिक विकास के लिए गीडा की स्थापना 1988 में की गई।


5. यमुना एक्सप्रेस- वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) - ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165.53 किलोमीटर व 6 लेन के प्रवेश नियंत्रित इस परियोजना के साथ ही साथ औद्योगिक विकास के उद्देश्य को लेकर यमुना (ताज) एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास । प्राधिकरण का गठन 2001 में किया गया


6. लखनऊ औद्योगिक विकास प्राधिकरण (लीडा) - नोएडा/ग्रेटर नोएडा की तर्क पर दो महासागरों के बीच इस प्राधिकरण की स्थापना 2005 में लखनऊ व उन्नाव के मध्य की गई।


7. उत्तर प्रदेश एक्सप्रेस- वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) - यूपीडा का गठन दिसंबर 2007 में किया गया है। इसका गठन एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं हेतु किया गया है।


प्रमुख निर्यात केंद्र राज्य में होने वाले निर्यात को बढ़ावा देने हेतु 1999 में निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो की स्थापना की गई। ग्रेटर नोएडा में आगरा में एक्सपोर्ट प्रमोशन इंड्रस्टियल पार्क स्थापित किया गया है। राज्य सरकार द्वारा घोषित प्रमुख निर्यातक जाने इस प्रकार

1. नोएडा - रत्न और आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक, परिधान, कंप्यूटर, हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर व चमड़ा सामान हेतु।

2. कानपुर - चमड़ा उत्पाद, सॉफ्टवेयर, रसायन, हैंडलूम, फार्मास्यूटिकल, मसाले, तेल और परफ्यूम आदि हेतु।

3. वाराणसी - रेशम ऊनी हस्तशिल्प, लकड़ी के खिलौने आदि हेतु।

4. लखनऊ - मिनियेचर पेंटिंग, फ्रलोरीकल्चर, आयुर्वेदिक हर्बल औषधि, केमल बोन काविंग आदि हेतु।

5. मुरादाबाद - आर्ट ग्रेटर वेयर, कलात्मक आभूषण, बोन ज्वैलरी आदि हेतु।

6. आगरा - सिल्क, कारपेट, हस्तशिल्प सामान, संगमरमर उत्पादन, कलात्मक सामान व बैग आदि हेतु।

7. झांसी और ललितपुर - पीतल के सामान हेतु।


सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग सुविधाएं

➤ मुरादाबाद लघु व मध्यम उद्योगों के विकास व निर्यात प्रोत्साहन हेतु उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम, उत्तर प्रदेश निर्यात निगम, भदोही औद्योगिक विकास प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश निर्यात प्रोत्साहन ब्यूरो, उद्योग निदेशालय व जिला उद्योग केंद्र विशेष रूप से प्रयत्नशील हैं।

➤ लघु उद्योगों के त्वरित विकास हेतु राज्य में कई योजनाएं संचालित हैं। तथा- त्वरित निर्यात प्रोत्साहन योजना, लघु उद्योग कलस्टर विकास योजना लघु उद्योग तकनीकी उन्नयन योजना, उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम, एकीकृत अवस्थापना विकास केंद्र योजना, लघु उद्यमी पुरस्कार योजना, शिल्पियों को प्रशिक्षण व उद्योग बंधु योजना आदि।

➤ लघु उद्योगों के विकास हेतु केंद्र के सहयोग से राज्य औ.वि. निगम द्वारा मथुरा, बंथरा (उन्नाव) एटा, कुर्सी (बाराबंकी), मसूरी गुलावटी (गाजियाबाद), बागपत, रामनगर, बबराला (बदायूं), संडीला (हरदोई) व नैनी (प्रयागराज) में समस्त सुविधाओं से युक्त एकीकृत अवस्थापना विकास केद्रों का विकास किया जा रहा है।

भारत सरकार द्वारा परतापुर (मेरठ), नुनहाई (आगरा) व शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) में तीन और औ. संस्थानों की स्वीकृति दी है।

➤ मार्च 2006 से केंद्र सरकार द्वारा क्लस्टर विकास योजना शुरू की गई। प्रत्येक कलस्टर में 60 से 80 प्रति. केंद्र का व शेष में राज्य व क्लस्टर एस.पी.वी. का योगदान होता है। 2016 के मध्य तक उत्तर प्रदेश के लिए केंद्र द्वारा कुल 26 क्लस्टरों हेतु धनराशि स्वीकृत की गई । प्रमुख क्लस्टर्स इस प्रकार हैं- कारपेट क्लस्टर्स (भदोही), ग्लास बीड्स (वाराणसी), पॉटरी क्लस्टर्स (खुर्जा, बुलंदशहर), कैंची क्लस्टर्स (मेरठ), लेदर क्लस्टर्स (चोरी चोरा गोरखपुर), कालीन क्लस्टर्स (मिर्जापुर), मेगा हथकरघा क्लस्टर्स (वाराणसी) इत्यादि।

➤ प्रतिवर्ष 8 से 15 दिसंबर तक अखिल भारतीय हस्तशिल्प सप्ताह मनाया जाता है।

➤ जिला उद्योग केंद्र की स्थापना 1978-79 में शुरू की गई। इस समय प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक-एक जिला उद्योग केंद्रों की स्थापना की गई है। इन केद्रों द्वारा छोटे उद्योगों के स्थापना के लिए भूखंड तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध करायी जाती है। जिला उद्योग केंद्रों में नव उद्यमियों के सहायतार्थ कई योजना, उद्योग बंधन योजना आदि चलाये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री रोजगार योजना का भी संचालन, जिला उद्योगों केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है।

➤ भारी, मध्यम व लघु उद्योगों के निवेश प्रस्तावों को सुविधाजनक बनाने हेतु जुलाई 2009 से राज्य के 18 जिलों में निवेश मित्र योजना संचालित है।

➤ सूचना तकनीक पर आधारित इस एकल खिड़की व्यवस्था से उद्योगपतियों की निवेश प्रस्ताव पेश करने व मंजूरी मिलने में समय बहुत कम लगता है।


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