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अमर्त्य सेन का जीवन परिचय

अमर्त्य सेन का जीवन परिचय

पारिवारिक पृष्ठभूमि

विश्व विख्यात अर्थशास्त्री एवं दार्शनिक अमर्त्य कुमार सेन का जन्म 03 नवम्बर, 1933 को कोलकाता के शान्ति निकेतन में एक बंगाली परिवार में हुआ था। अमर्त्य सेन के पिता श्री आशुतोष सेन ढाका विश्वविद्यालय में प्रोफेसर थे। बाद में वह पश्चिम बंगाल लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष बनाए गए। अमर्त्य सेन की माता अमिता सेन प्राचीन एवं मध्यकालीन इतिहास के भारत के जाने माने इतिहासविद श्री क्षितिमोहन सेन की पुत्री थी।


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अमर्त्य सेन का जीवन परिचय


शिक्षा दीक्षा

अमर्त्य की प्रारम्भिक शिक्षा 1940 में ढाका के सेंट ग्रेगरी स्कूल से प्रारम्भ हुई। उन्होंने 1951 में कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया और 1953 में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। 1953 में ही अमर्त्य सेन कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज चले गए। कैम्ब्रिज से ही अमर्त्य सेन ने पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की। उनकी पीएच.डी का विषय था “दि च्वाइस ऑफ टेक्निक्स"। अमर्त्य सेन ने इस विषय पर अथक परिश्रम किया। 


पेशेवर कॅरियर

अमर्त्य सेन ने अपना कॅरियर जाधवपुर विश्वविद्यालय में एक प्राध्यापक के मेसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलोजी में विजिटिंग प्रोफेसर रहे। और शोध छात्र के तौर पर प्रारम्भ किया। 1960-71 के दौरान आप अमेरिका कुछ समय तक आप यू.सी.वर्कले और कार्नेल में भी विजिटिंग प्रोफेसर रहे। 1963 और 1971 के मध्य आप दिल्ली स्कूल ऑफ इकॅनोमिक्स में प्रोफेसर रहे। इस दौरान आपने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, भारतीय सांख्यिकी संस्थान, सेण्टर फॉर डिवलपमेंट स्टडीज, गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एण्ड इकॉनोमिक्स और सेंटर फॉर स्टडीज इन सोसल साइन्सेज में भी अध्यापन किया। 1972 से 1977 तक अमर्त्य सेन ने लंदन स्कूल ऑफ इकॉनोमिक्स में अध्यापन कार्य किया। 1977-1986 तक आप ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहे। 1987 में आप हार्वर्ड विश्वविद्यालय में प्रोफेसर चुने गए और 1998 से वर्ष 2004 तक आप ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज में मास्टर रहे। सन् 2007 में आपको नालन्दा मेंटोर ग्रुप का अध्यक्ष बनाया गया। 2012 में अमर्त्य सेन को नालंदा विश्वविद्यालय का कुलाधिपति बनाया गया। आप वर्ष 2015 तक नालन्दा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रहे। इसके अतिरिक्त, आप हार्वर्ड सोसाइटी ऑफ फैलोज में वरिष्ठ फैलो, ऑल सोल्स कॉलेज, ऑक्सफोर्ड में विशिष्ट फैलो, डार्विन कॉलेज कैम्ब्रिज के मानद फैलो तथा ट्रिनिटी कॉलेज में फैलो भी रहे।


पारिवारिक जीवन

अमर्त्य सेन ने अपने जीवन में तीन विवाह किए। उनका पहला विवाह नवनीता देव सेन के साथ सन 1956 में हुआ। नवनीता से दो बच्चे हैं- बेटी का नाम अंतरा सेन और बेटे का नाम नंदन सेन है। 1971 में यह विवाह टूट गया। अमर्त्य सेन का दूसरा विवाह इटली की एक अर्थशास्त्री ईवा कोलोरनी के साथ 1978 में हुआ। ईवा से एक पुत्री इन्द्रानी और एक पुत्र कबीर का जन्म हुआ। कैंसर की बीमारी के कारण ईवा की सन् 1985 में मृत्यु हो गयी। अमर्त्य सेन का तीसरा विवाह सन् 1991 में एम्मा जोर्जिना के साथ हुआ।


अमर्त्य सेन के विचार 

अमर्त्य सेन को कल्याणकारी अर्थव्यवस्था का जनक कहा जाता है। अमर्त्य पहले ऐसे अर्थशास्त्री हैं जिनका ध्यान गरीबों को गरीबी से मुक्त कराने पर गया। सन् 1981 में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'पावर्टी एंड फेमाइन्स में उन्होंने बताया कि अकाल सिर्फ भोजन की कमी से नहीं बल्कि खाद्यान्नों के वितरण में असमानता के कारण भी होता है। अमर्त्य सेन का सबसे महत्वपूर्ण योगदान 'कैपेबिलिटी का सिद्धान्त' जिसका प्रतिपादन उन्होंने अपनी पुस्तक 'इक्विलिटी ऑफ हाट' में किया। असमानता पर अमर्त्य के सिद्धान्त ने यह व्याख्या की कि भारत और चीन में महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों की संख्या अधिक क्यों है जबकि पश्चिमी और दूसरे कुछ गरीब देशों मैं भी महिलाओं की संख्या पुरूषों से अधिक है। अमर्त्य सेन के अनुसार भारत और चीन में महिलाओं की संख्या इसलिए कम है क्योंकि इन देशों में लडकियों की अपेक्षा लड़कों को बेहतर चिकित्सा एवं भरण-पोषण की उत्तम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।


अमर्त्य के अनुसार कुछ ऐसे ठोस उपाय किए जा सकते हैं जिनके द्वारा मनुष्य को दरिद्रता से छुटकारा दिलाया जा सकता है। उनका मानना है कि विश्व में अनेकों ऐसे लोग हैं जिनका जीवन दुःख और दरिद्रता से घिरा हुआ है। भारत में गरीबी का मुख्य कारण शिक्षा का अभाव और साधन हीनता है। धन किस प्रकार कमाया जाए इसका ज्ञान भी हमें शिक्षा से ही प्राप्त होता है। शिक्षित व्यक्ति अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर धर्म के नाम पर कभी गुमराह नहीं होता है। शिक्षित व्यक्ति अपने आर्थिक स्तर को ऊँचा उठाने के लिए तरह-तरह के रास्ते तलाशता है।


अमर्त्य सेन का लेखनकार्य

1. कलेक्टिव च्वाइस एंड सोशल वेल्फेयर-1970, 2. पावर्टी एंड फेमाइन्स एन एस्से ऑन इनटाइटिलमेंट एंड डिप्राइवेशन, 3. दि च्वाइस ऑफ टेक्निक्स, 4. वेल्फेयर एंड मैनेजेमेंट, 5. इण्डियन डेवलपमेंट एंड पार्टिसिपेशन, 6. ग्रोथ इकोनॉमिक्स, 7. ऑन इथिक्स एंड इकोनॉमिक्स, 8. ऑन इकॉनामिक इनइक्वेलिटी, 9. इण्डिया- इकॉनोमिक डेवलपमेंट एंड सोशल अपॉर्चुनिटी, 10. हंगर एंड पब्लिक एक्शन, 11. दि पॉलिटिकल इकोनॉमी ऑफ हंगर, 12. रिसोर्सेस - वैल्यूज एंड डिवलपमेंट, 13. इंप्लायमेंट टेक्नॉलोजी एंड डेवलपमेंट, 14. अनसन ग्लोरी, 15. डिवलपमेंट एज फ्रीडम, 16. इनइक्वेलिटी रीइक्जामिंड, 17. च्वाइस, वेलफेयर एंड मैनेजमेंट, 18. स्टेण्डर्ड ऑफ लिविंग, 19. कमोडिटीज एंड कैपेबिलिटीज, 20. दि आइडिया ऑफ जस्टिस उनके लेखन के यह कुछ उदाहरण हैं। इसके अलावा भी उन्होंने सैकड़ों पुस्तकें और 300 से अधिक शोध निबंध लिखे हैं।


पुरस्कार तथा सम्मान

  • एडम स्मिथ प्राइज, 1954
  • फॉरेन ऑनरेदी मेम्बर ऑफ दि अमेरिकन अकाडेमी ऑफ आर्ट्स एंडबसाइंसेज, 1981
  • इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज द्वारा ऑनरेरी फैलोशिप, 1984
  • नोबेल प्राइज इन इकानोमिक साइसेज, 1998
  • भारत रत्न 1999
  • बंग्लादेश की ऑनरेरी राष्ट्रीयता 1999
  • आर्डर ऑफ कम्पैनियन ऑफ ऑनर-यूके 2000
  • ले ओन्तिएफ प्राइज, 2000
  • आइजनहावर मेडल फॉर लीडरशिप एंड सर्विस, 2000
  • 351 वीं स्प एट हार्वर्ड, 2001
  • इण्डियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड, 2004
  • यूनिवर्सिटी ऑफ पाविया द्वारा आनरेरी डिग्री, 2005 नेशनल ह्यूमैनिटीज मेडल, 2011
  • ऑर्डर ऑफ दि एज्टेक ईगल, 2012
  • कमांडर ऑफ दि फ्रेंच लीजन ऑफ ऑनर, 2013
  • एडीटीवी 25 ग्रेटेस्ट ग्लोबल लिविंग लीजेन्ड्स इन इण्डिया, 2014
  • ब्रिटिश की रॉयल अकादमी द्वारा वर्ष 2015 में चार्ल्सटन ईएफजी जॉन मेनार्ड कीन्स अवार्ड
  • इसके अलावा श्री अमर्त्य सेन को कई अन्य पुरस्कारों द्वारा भी सम्मानित किया गया।


जनहित के कार्य

अमर्त्य सेन ने अपना सम्पूर्ण जीवन जनहित को न्यौछावर कर दिया। उनका सम्पूर्ण दर्शन गरीबों की गरीबी मिटाने के लिए समर्पित है। 1998 में अमर्त्य सेन को नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया। अमर्त्य सेन ने नोबेल पुरस्कार से मिली लगभग 5 करोड़ रूपये की धनराशि का एक भी पैसा अपने लिए उपयोग नहीं किया बल्कि उससे एक ट्रस्ट बनाया और उस धन राशि का उपयोग भारत के गरीब विद्यार्थियों को विदेश में शिक्षा प्राप्त करने पर किए जाने को दिया। अमर्त्य के इस कार्य की देश-विदेश में भारी सराहना हुई।


भारत रत्न

अर्थशास्त्र के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों के सम्मान स्वरूप भारत सरकार ने 1999 में अमर्त्य सेन को भारत रत्न के लिए चुना । भारत अर्थशास्त्र के क्षेत्र में की गई उनकी सेवाओं के लिए अमर्त्य सेन का सदैव ऋणी रहेगा।


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